रोबोट के जरिए समुद्र के अंदर के होंगे खुलासे

 

 

 

 

जेली फिश का हमशक्ल रोबोट करेगा समुद्री जीव-जंतुओं के रहस्यों का खुलासा

(ब्‍यूरो कार्यालय)

इंदौर (साई)। समुद्री जीवन के रहस्यों से पर्दा हटाने में मदद के लिये इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने एक विशेष रोबोट का प्रोटोटाइप (नमूना) संस्करण विकसित किया है।

जेली फिश की तरह नजर आने वाला यह रोबोट पानी के भीतर इसी समुद्री जीव की नकल करते हुए खामोशी से चलता है और सागर की अतल गहराइयों में पहुंचकर वहां के दुर्लभ दृश्यों को कैमरे में कैद कर सकता है। आईआईटी की मैकेट्रॉनिक्स एंड इन्स्ट्रुमेन्टेंशन लैबोरेटरीके प्रमुख आई ए पलानी ने बताया कि करीब 250 ग्राम वजन वाला यह रोबोट प्रोटोटाइप छह महीने के सतत अनुसंधान से विकसित किया गया है। इसके ढांचे के निर्माण में नरम पॉलीमर का इस्तेमाल किया गया है।

उन्होंने बताया, “हमने इस रोबोट को जेली फिश का हमशक्ल बनाया है, ताकि वास्तविक परिस्थितियों में इसका प्रयोग किये जाने पर समुद्री जीवों को इसकी मौजूदगी स्वाभाविक लगे और वह उनके करीब जाकर उनकी गतिविधियों को कैमरे में कैद कर सके।” आईआईटी के अनुसंधानकर्ताओं ने जेली फिश रोबोट को गति देने के लिये एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया है। पलानी ने बताया, “समुद्री जीवन के अध्ययन के मकसद से विकसित किये जाने वाले पारंपरिक रोबोट को गति प्रदान करने के लिये आमतौर पर इनमें मोटर लगायी जाती है, लेकिन इससे इन रोबोटो की कार्यक्षमता सीमित हो जाती है, क्योंकि मोटर की आवाज से कई समुद्री जीव प्रभावित हो सकते हैं। नतीजतन सागर के अंदर जीव-जंतुओं की स्वाभाविक गतिविधियों को कैमरे में कैद करने में मुश्किल हो सकती है।”

उन्होंने बताया, “मोटर के इस्तेमाल से जुड़ी इस कमी को ध्यान में रखते हुए हमने जेली फिश रोबोट को पानी के भीतर चलाने के लिये शेप मेमोरी अलॉय (खास तरह की मिश्र धातु) के तारों का इस्तेमाल किया है। शेप मेमोरी अलॉय ऐसा स्मार्टपदार्थ होता है जो तापमान में बदलाव किये जाने पर सिकुड़ सकता है और बाद में फैलकर अपने मूल स्वरूप में लौट सकता है।”

पलानी ने बताया, “हमने शेप मेमोरी अलॉय की इसी खासियत का प्रयोग जेली फिश रोबोट को पानी के भीतर गति प्रदान करने के लिये किया है। विशेष तकनीकी से शेप मेमोरी अलॉय के तारों को इस तरह लगातार ठंडा-गर्म किया जाता है कि रोबोट पानी के अंदर जेली फिश की तरह चलता है।” बहरहाल, समुद्र के भीतर के वास्तविक हालात में जेली फिश रोबोट का परीक्षण अभी बाकी है।

मैकेट्रॉनिक्स एंड इन्स्ट्रुमेन्टेंशन लैबोरेटरीके प्रमुख ने बताया, “हमने प्रयोगशाला के माहौल में जेली फिश रोबोट का सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण के दौरान रोबोट हर सेकंड एक सेंटीमीटर की रफ्तार से चलता दिखायी दिया है। वास्तविक हालात में रोबोट को परखते हुए इसे सागर की गहराइयों में भेजने के लिये राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (एनआईओ) से संपर्क साधा जा रहा है।”

पलानी ने बताया कि जेली फिश रोबोट के शुरूआती डिजाइन में बैटरी की व्यवस्था भी की गयी है। हालांकि, जरूरत के मुताबिक इसके उन्नत संस्करण में बैटरी की जगह सौर पैनल लगाया जा सकता है जिससे यह अपेक्षाकृत लम्बे समय तक काम कर सकता है। रोबोट को समुद्र की ऊपरी सतह पर तैराकर सूर्य की रोशनी की मदद से इसे दोबारा चार्ज भी किया जा सकेगा।