सिवनी को बनाया गया था राजधानी!

 

 

 

0 प्रशासन लिखवा रहा जिले का नया इतिहास . . . 05

पिण्डारों ने मचाया था जमकर आतंक, हुआ था कत्लेआम!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। जिले के इतिहास को दबाने की कोशिश होती नज़र आ रही है। इससे उलट सरकारी वेब साईट में अनेक बातों को या तो भूलवश या जानबूझकर ही हटाया गया है। आने वाली पीढ़ी को सिवनी के मूल इतिहास की जानकारी होने की संभावनाएं इससे क्षीण होती दिख रही हैं।

जानकार बताते हैं कि सिवनी के इतिहास को लिपिबद्ध करने के लिये अनेक प्रयास किये गये हैं। सत्तर के दशक में प्राचार्य रहे स्व.शिवराज नंदन शर्मा के द्वारा सिवनी प्राचीन अर्वाचीन एवं सेवा निवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी जानकी प्रसाद पाठक के द्वारा सिवनी आजकल नामक किताबें भी इतिहास को लेकर लिखी गयी हैं। इसके अलावा इतिहास के जानकार राजेंद्र नेमा के द्वारा भी अनेक तथ्यों को सहेजकर रखा गया है।

जानकारों की मानें तो 1743 में विदर्भ के नागपुर में रघुजी भोंसले के राजतिलक के समय अपने विश्वस्त मुहम्मद खान को संग्रहरी के स्थान पर सिवनी का क्षेत्र दिया जाकर उन्हें दीवान बना दिया गया था। 175 में मोहम्मद खान के अवसान के उपरांत उनके साहेबजादे मजीद खान भी फौत हो गये। 1774 में मोहम्मद खान के नवासे मो.अमीन खान को यहाँ का राजपाट दिया गया था।

मो.अमीन खान के द्वारा उस समय की राजधानी छपारा के स्थान पर बहुत ही साधारण से गाँव सिवनी को अपनी राजधानी बना लिया गया था। 1798 में अमीन खान के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी जम्मन खान ने राजपाट सम्हाला। राजधानी भले ही सिवनी बन चुकी थी पर छपारा का वैभव कम नहीं हुआ था।

जानकारों की मानें तो जुम्मन खान के शासन काल में छपारा की आबादी लगभग चालीस हजार से ज्यादा थी। प्रशासन का संचालन सिवनी से हो रहा था इसलिये छपारा क्षेत्र में फौज कम ही रहा करती थी। छपारा के लोग इन परिस्थितियों में अपने आप को असुरक्षित महसूस करने लगे थे।

पिण्डारियों का आक्रमण : 1810 में दीपावली के पर्व के चलते फौज के अधिकांश लोग नागपुर चले गये थे। इसी दौरान पिण्डारियों ने छपारा क्षेत्र पर हमला बोल दिया। पिण्डारियों ने इस दौरान जमकर लूटपाट की और हत्याएं भी कीं। सिवनी के इतिहास को लेकर लिखी गयी एक किताब सिवनी प्राचीन एवं अर्वाचीन के पृष्ठ (22) में लिखा है कि इस दिन चालीस हजार लोगों की हत्या की गयी। बाद में बैनगंगा के तट पर बड़ा गड्ढा खोदकर उन लाशों का दफन किया गया।

इस किताब की मानें तो इस स्थान को गंज शहीद कहते है। आज भी गंज शहीद में स्मारक रूप में बनाये गये चबूतरे के अंश दिखायी पडते हैं। कहते है इस लूट मे पिण्डारियों को इतना सोना मिला कि उन्होंने अन्य बहुमूल्य सामग्रियों को अपने साथ ले जाना उचित नहीं समझा। कर्नल एलीमन की रपट से ज्ञात होता है कि इस भीषण विनाश को छपारा बर्दाश्त नहीं कर सका और छपारा का क्षेत्र उजाड़ हो गया।

(क्रमशः)

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