डॉ.आर्या ने लिया तबादले पर स्थगन!

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सीहोर से सिवनी स्थानांतरित किये गये सीहोर के सिविल सर्जन डॉ.भरत भूषण आर्य के तबादले के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा स्थगन दे दिया गया है। जब तक अभ्यावेदन का निराकरण नहीं हो जाता याचिका कर्त्ता को सीहोर से सिवनी स्थानांतरित किये जाने पर रोक लगाते हुए याचिका का पटाक्षेप कर दिया गया।

यह मामला स्टेट की ट्रांसफर पॉलिसी के विपरीत सेवा निवृत्ति के लिये महज़ 11 माह शेष होने के बावजूद स्थानांतरण किये जाने के रवैये को चुनौती से संबंधित था। याचिका कर्त्ता की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिका कर्त्ता को 05 जुलाई 2019 को जारी स्थानांतरण आदेश के जरिये जिला चिकित्सालय सिवनी में अस्थि रोग विशेषज्ञ बतौर स्थानांतरित किया गया है जबकि वह वर्तमान में जिला चिकित्सालय सीहोर में प्रभारी सिविल सर्जन बतौर कार्य कर रहा है।

स्टेट की ट्रांसफर पॉलिसी के विपरीत आदेश जारी : कोर्ट को अवगत कराया गया कि प्रदेश की मौजूदा सरकार हाल ही में जो ट्रांसफर पॉलिसी लायी है, उसके तहत शासकीय सेवक की सेवा निवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय रह जाने पर तबादला नहीं किया जायेगा। इसके बावजूद याचिका कर्त्ता को सेवा निवृत्ति के लिये महज़ 11 माह शेष होने पर भी मौजूदा पदस्थापना स्थल से 400 किलोमीटर दूर भेजा जा रहा है।

पत्नि सीहोर में है मेडिकल ऑफिसर के रूप में पदस्थ : बहस के दौरान अधिवक्ता आदित्य संघी ने जोर देकर कहा कि याचिका कर्त्ता की पत्नि सीहोर में ही मेडिकल ऑफिसर बतौर कार्यरत हैं। राज्य की तबादला नीति में स्पष्ट उल्लेख है कि पति – पत्नि दोनों के शासकीय सेवक होने की सूरत में उनकी पदस्थापना एक ही जगह रखी जायेगी। ऐसे में किसी एक का अन्यत्र तबादला नहीं किया जायेगा। इसके बावजूद ऐसा किया गया है।

माँ को कैंसर, इंदौर में उपचार जारी : याचिका कर्त्ता की ओर से कहा गया कि उसकी माँ 92 वर्षीय बुजुर्ग हैं, जो कैंसर की रोगी हैं और उनका उपचार इंदौर में चल रहा है। ऐसे में यदि सीहोर से 400 किलोमीटर दूर जॉईनिंग दी गयी तो भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा जबकि सेवा निवृत्ति नजदीक है, ऐसे में ट्रांसफर अनुचित है।