फिर नपे जैसवाल बंधु

 

अवैध लकड़ी मामले में सुनायी सजा

(अपराध ब्यूरो)

सिवनी (साई)। माननीय न्यायालय के द्वारा परमानंद जैसवाल और रामगोपाल जैसवाल को अवैध लकड़ी रखने के मामले में सजा सुनायी है।

अभियोजन कार्यालय के मीडिया प्रभारी मनोज सैयाम ने बताया कि 17 नवंबर 2011 को परमानंद पिता जिया लाल जैसवाल एवं उनके भाई राम गोपाल पिता जिया लाल जैसवाल निवासी टुरिया तहसील कुरई के खवासा के बारापत्थर स्थित निर्माणाधीन मकान जो चार साल से बंद था में सागौन की 14 चौखटें जप्त की गयी थीं।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में अभियुक्तों से पूछताछ किये जाने पर उनके द्वारा कुछ दस्तावेज प्रस्तुत किये गये। इन दस्तावेजों का चौखटों से मिलान नहीं हो पाने पर विभाग के द्वारा परमानंद और रामगोपाल जैसवाल के खिलाफ अवैध सागौन रखने का मामला पंजीबद्ध किया गया।

उन्होंने बताया कि इसकी सुनवायी माननीय अति मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सिवनी, श्रीमति सुमन उईके के न्यायालय में की गयी, जिसमें शासन की ओर से श्रीमति उमा चौधरी, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी के द्वारा गवाह और सबूत पेश किये गये। इन पर विश्वास करते हुए माननीय न्यायालय द्वारा दोनों आरोपी भाईयो को धारा- 26(1)(छ) भारतीय वन अधिनियम 1927 में दोषी पाते हुए दोनों को 01-01 वर्ष का कठोर कारावास एवं 5000 – 5000 रूपये के अर्थदण्ड की सजा से दण्डित किया गया है।