जिले में हैं महज़ चार विभाग!

 

 

0 प्रशासन लिखवा रहा जिले का नया इतिहास . . . 08

जिले के शेष विभागों को नहीं मिला सरकारी पोर्टल में स्थान

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। समाचार पत्रों और अन्य मीडिया साधनों में जैसे – जैसे सिवनी जिले की सरकारी वेब साईट में व्याप्त विसंगतियों को उजागर किया जा रहा है वैसे – वैसे इस पोर्टल में उन बातों का समावेश किया जा रहा है, जिन्हें सामने लाया जा रहा है। इस पोर्टल में विस्तार से चीजों के न होने से अभी भी भ्रम की स्थिति ही बनी हुई है।

जिला प्रशासन के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी डॉट एनआईसी डॉट इन नामक इस सरकारी वेब पोर्टल को अद्यतन कर नये क्लेवर में पेश करने के लिये राज्य शासन के द्वारा निर्देशित किया गया था। इस तरह के निर्देश प्रदेश के हर जिले के सरकारी पोर्टल के लिये दिये गये थे।

सूत्रों ने बताया कि इस पोर्टल को बनाने और इसमें सिवनी जिले के सामरिक, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की चीजों को शामिल करने के लिये प्रशासन को काफी पहले से तैयारियां आरंभ कर दी जानी चाहिये थी। इसके लिये सिवनी जिले के इतिहास को लेकर लिखी गयी किताबें और पुरातत्व संग्रहालय के पास उपलब्ध बातों का अध्ययन किया जाना चाहिये था।

सूत्रों ने बताया कि साल भर पढ़ाई न कर परीक्षा के एक दिन पहले ट्वंटी सीरीज या गागर में सागर (इन किताबों में विषय से संबंधित कुछ प्रश्न और उत्तर होते हैं जो परीक्षा में आ सकते हैं) जैसी किताबें पढ़कर परीक्षा देने की तर्ज पर इस पोर्टल को आनन – फानन तैयार करवाया जाकर 22 जुलाई को इसे ऑन एयर करवा दिया गया था।

शनिवार को जब इस पोर्टल के विभाग वाले बटन को देखा गया तो इसमें कृषि, पशु पालन, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ही नज़र आये। इस पोर्टल को जो देख रहे होंगे उन्हें यही लग रहा होगा कि सिवनी जिले में महज़ चार विभाग ही अस्तित्व में हैं। कृषि विभाग के पोर्टल में महज़ 05 सरकारी योजनाओं के अलावा नवाचार के नाम पर एक पैराग्राफ का उल्लेख किया गया है। इसमें जिले में कृषि विभाग के कितने कार्यालय हैं इसका उल्लेख करना भी प्रशासन ने मुनासिब नहीं समझा है।

पशु पालन विभाग में जिले के 30 औषधालय इसमें प्रदर्शित किये गये हैं। शिक्षा विभाग की जिला स्तर की जानकारी अगर कोई देखना चाहे तो इसमें एक पैराग्राफ के बाद जो लिंक दिया गया है वह राज्य स्तरीय पोर्टल को खोलता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग में जिले के 09 अस्पतालों के नंबर प्रदर्शित हो रहे हैं। मजे की बात तो यह है कि इसमें किसी भी विभाग के विभाग प्रमुख आदि की जानकारी भी मुहैया नहीं करवायी गयी है।

(क्रमशः जारी)