कोटपा कानून को भूली पालिका

 

 

शालाओं के आसपास धुंआ उड़ाते दिखते हैं युवा

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सरकार के द्वारा विद्यार्थियों का भविष्य संवारने के लिये तरह – तरह की सुविधाएं मुहैया करवायी जा रही हैं, पर शालाओं के आसपास पान गुटकों की दुकानें हटवाने में नगर पालिका और शिक्षा विभाग को पसीना आता दिख रहा है। अनेक दुकानें तो शाला परिसर के द्वार के पास ही हैं जहाँ शाला लगने के समय युवा धुंए के छल्ले उड़ाते हुए सहज ही दिख जाते हैं।

ज्ञातव्य है कि कमोबेश हर साल शिक्षा विभाग के द्वारा इस तरह के आदेश जारी किये जाते हैं जिसमें शालाओं के आसपास पान की दुकानें नहीं होने की बात कही जाती है। ये आदेश महज रस्म अदायगी के लिये ही जारी होते हैं। इस साल अब तक शिक्षा विभाग के द्वारा इसकी सुध नहीं ली गयी है।

आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि जिन शालाओं में छात्राएं पढ़तीं हैं उन शालाओं के आसपास भी पान की दुकानें बकायदा सजी हुई ही हैं। हाल ही में कोतवाली पुलिस के द्वारा शालाओं के आसपास घूमने वाले मजनुओं के खिलाफ कार्यवाही को अंजाम तो दिया गया है पर जिले भर में फैलीं नशे की इन दुकानों के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही नहीं किया जाना आश्चर्य जनक ही माना जा रहा है।

जानकारों का कहना है कि शालाओं से सौ मीटर (लगभग तीन सौ फीट) की परिधि में पान गुटकों की दुकानें नहीं होना चाहिये। यह तंबाकू नियंत्रण अधिनियम की धारा 06बी का खुला उल्लंघन की श्रेणी में आता है। अनेक शालाओं के छात्रों को भी गणवेश में ही धुंए के छल्ले बनाते देखा जा सकता है।

क्या है कोटपा कानून : जानकारों का कहना है कि तंबाकू नियंत्रण कानून कोटपा 2003 की धारा 06बी के तहत किसी भी शासकीय या अशासकीय शैक्षाणिक संस्थानों से 100 मीटर (तकरीबन 300 फीट) के दायरे में किसी भी तरह की नशे, पान की दुकानें संचालित नहीं हो सकती हैं।

सिगरेट एंड अदर टोबेको प्रोडक्ट (प्रोहिबिशन ऑफ एडवर्टीजमेंट एंड रेग्युलेशन ऑफ ट्रेड एंड कॉमर्स, प्रोडक्शन, सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) एक्ट 2003 को देशभर में एक समान रूप से तंबाकू से जुड़े सभी उत्पाद जैसे सिगरेट, सिगार, बीड़ी, गुटखा, पान – मसाला, खैनी, स्नफ उत्पादों पर लागू किया गया था।

इसके सेक्शन 04 के तहत सभी सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है। सरकारी एवं निजि क्षेत्र के सार्वजनिक स्थलों पर नो स्मोकिंग जोन का साईन बोर्ड लगा होना चाहिये।

इस कानून के सेक्शन 05 के तहत तंबाकू उत्पाद के विज्ञापन, प्रमोशन और प्रोत्साहन पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तंबाकू उत्पाद का विज्ञापन नहीं किया जा सकता है। सांस्कृतिक समारोह या खेल के जरिये तंबाकू उत्पाद कंपनियां – प्रमोशन नहीं कर सकती हैं।

इसी कानून के सेक्शन 06 के तहत नाबालिगों को बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। (6-बी) शैक्षणिक संस्थानों के चारों ओर 100 यार्ड की परिधि में तंबाकू उत्पाद की बिक्री नहीं की जा सकती है। सेक्शन 07 के तहत टोबेको प्रोडक्ट पर चेतावनी देना आवश्यक है। सिगरेट समेत तंबाकू से बने उत्पादों पर स्वास्थ्य के लिये खतरनाक होेने की चेतावनी बड़े अक्षरों में लिखना अनिवार्य है।

सिवनी शहर सहित जिले भर में कोटपा कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ायी जा रही हैं। इसके बाद भी अब तक जिम्मेदारों के द्वारा इस कानून का पालन सुनिश्चित करवाने की दिशा में किसी तरह की कार्यवाही नहीं किया जाना आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है।

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