बहुत ध्यान से सुनते थे बात इसलिए गुरुजी ने नाम में जोड़ दिया ‘गौर’

 

 

 

 

(ब्‍यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री बाबूलाल के नाम के साथ गौरजुड़ने की कहानी कम दिलचस्प नहीं है। अमूमन लोग उनके नाम के साथ गौरजुड़ा देखकर उसे उनकी जाति समझ लेते हैं या कुछ लोग यह मान लेते हैं कि हो सकता है कि वह गौड़ जाति के हों, लेकिन दोनों ही अनुमान सही नहीं हैं।

बाबूलाल यादव परिवार में जन्मे थे। उनका जन्म यूपी के प्रतापगढ़ में हुआ था। उनके पिता पहलवान थे लेकिन रोजगार की तलाश में वह मध्य प्रदेश चले आए। यहीं पर बाबूलाल की स्कूली शिक्षा हुई। संघ से नजदीकी बढ़ी और फिर उन्हें एक रास्ता मिला, जो उन्हें सूबे की सीएम की कुर्सी तक ले गया।

अखिलेश यादव से मिले तब बात आई सामने

2012 में जब यूपी में अखिलेश यादव सीएम बने तो बाबूलाल गौर उनसे मिलने के लिए पहुंचे। तब पहली बार यह बात आई कि बाबूलाल तो प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं और यादव हैं। उन्होंने खुद अपने नाम के साथ यादव के बजाय गौर लिखे होने की वजह बताई थी। उन्होंने बताया कि वह बचपन से घर, बाहर, स्कूल हर जगह सबकी बात बहुत ध्यान से सुनते थे, इसलिए लोग उनको बहुत पंसद किया करते थे।

शिक्षक ने ही बदल दिया था टाइटल

स्कूल के दिनों में एक ही कक्षा में बाबूलाल यादव नाम के दो छात्र थे, जिसकी वजह से अक्सर भ्रम हो जाया करते था। उस भ्रम को खत्म करने के लिए उनके मास्टर साहब ने उनके नाम से यादव हटाते हुए गौर से बात सुनने की वजह से गौरलगा दिया। वहीं, दूसरे छात्र के आगे यादव लिखा रहने दिया। मीडिया ने सवाल किया था कि नाम के साथ यादव हटने का अफसोस होता है तो वह बोले थे, ‘जब मेरे भीतर कभी यूपी का सीएम बनने की ख्वाहिश जगती तो लगता कि काश मेरा नाम बाबूलाल यादव ही होता।