बीजेपी ने अगस्त महीने में ही खोए तीन बड़े नेता

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली (।तनद रंपजसमल ) का निधन हो गया है. लेकिन सिर्फ जेटली ही नहीं बीजेपी ने इस महीने में तीन बड़े रत्न खोए हैं। इन तीनों का कनेक्शन मध्यप्रदेश से रहा है। अगस्त महीने में ही पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन हुआ। वह मध्यप्रदेश की विदिशा से सांसद रही हैं। उसके बाद मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम बाबूलाल गौर का निधन हो गया है।

अगस्त का महीना बीजेपी के लिए इस साल मनहूस साबित हुआ है। पार्टी ने तीन कद्दावर नेताओं को खो दिया है। तीनों का कद्द इतना बड़ा था कि ये हमेशा पार्टी के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं। सबसे पहले बात करते हैं बीजेपी की कद्दावर नेत्री रहीं सुषमा स्वराज की। सुषमा अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी मंत्री थीं। उसके बाद मोदी सरकार वन में भी वह विदेश मंत्रालय जैसे अहम मंत्रालय को संभाल रही थीं।

सुषमा स्वराज का 6 अगस्त 2019 को हुआ निधन

सुषमा स्वराज का निधन इसी साल 6 अगस्त 2019 को हुआ है। सुषमा मध्यप्रदेश की विदिशा से सांसद थीं। 2019 के चुनाव में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। साथ ही मोदी सरकार की मंत्रिमंडल में भी शामिल नहीं हुईं। सुषमा स्वराज का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। उसके बाद से वह सरकारी कार्यों को संभाल जरूर लिया था लेकिन राजनीतिक गतिविधियों में कम ही हिस्सा लिया। लेकिन खुद को सोशल मीडिया पर जरूर एक्टिव रखती थीं। सुषमा का मध्यप्रदेश से विशेष लगाव रहा है। कई मौकों पर यहां जरूरतमंदों को वह व्यक्तिरूप से भी मदद की।

पूर्व सीएम बाबूलाल गौर का भी हुआ निधन

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल गौर का भी इसी अगस्त महीने में निधन हो गया। बाबूलाल गौर भी मध्यप्रदेश के कद्दावर नेताओं में से एक थे। उनका निधन लंबी बीमारी के बाद 21 अगस्त 2019 को हुआ। तबियत खराब होने के बाद उन्हें भोपाल के नर्मदा अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। वहां उन्होंने अंतिम सांस ली। बाबूलाल गौर जनसंघ के जमाने से भारतीय जनता पार्टी के लिए काम रहे थे। एक कार्यकर्ता के रूप में करियर शुरू कर उन्होंने सीएम तक सफर तय किया।

24 अगस्त को हुआ जेटली का निधन

बाबूलाल गौर के निधन के पांच दिन बाद यानी कि अगस्त महीने के ही 24 तारीख को बीजेपी ने एक और रत्न खो दिया है। जेटली का मध्यप्रदेश से भी लगाव रहा है। 2002-2003 में अरुण जेटली मध्यप्रदेश बीजेपी के प्रभारी भी थे। इसके साथ ही वह आखिरी बार मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी का मेनिफेस्टो जारी करने मध्यप्रदेश आए थे। हालांकि मध्यप्रदेश बीजेपी में जब-जब राजनैतिक संकट उत्पन्न हुई, इससे उबारने में जेटली की भूमिका अहम रही है।

गौरतलब है कि मनहूस अगस्त की चर्चाएं सोशल मीडिया पर हैं। क्योंकि इसी महीने में पार्टी ने अपने तीन महत्वपूर्ण नेताओं को बीमारी की वजह से खो दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन भी पिछले साल अगस्त के महीने में ही हुआ था।