दो वर्षों में घाटी की फिजा बदल जाएगी : नामग्याल

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्‍ली (साई)। लद्दाख से जीतकर आए युवा सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल संसद में धारा 370 पर चर्चा के दौरान दिए अपने जोरदार भाषण से सबका ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहे। उनके जरिए देश की नजर उस लद्दाख क्षेत्र की जरूरतों की ओर गई जो राष्ट्रीय मीडिया में शायद ही कभी चर्चा में आता है। नामग्याल जब दिल्ली से लद्दाख पहुंचे तो लोगों ने उन्हें सिर-आंखों पर बिठाया। वहां के लोगों की उम्मीदें जाग गई हैं। इन्हीं बढ़ी हुई अपेक्षाओं की रोशनी में धारा 370 पर सरकार के फैसले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर बीजेपी सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल से रमेश ठाकुर ने बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

अनुच्छेद 370 हटाने के बाद आप जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की कैसी तस्वीर देख रहे हैं?

सब कुछ ठीक रहा तो 70 सालों में जो विकास जम्मू-कश्मीर में नहीं हुआ वह 7 महीनों में दिखाई देगा। अवाम के विकास को ध्यान में रखकर ही गहन मंथन के बाद अनुच्छेद 370 को हटाने का फैसला किया गया है। कांग्रेस भ्रम फैला रही है कि निर्णय में रायशुमारी नहीं हुई। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि अनुच्छेद 370 के लिए बाकायदा लोगों की राय ली गई। विपक्षी दलों को अगर शक है तो अपने स्तर से पूरे जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह कराकर देखें। हकीकत सामने आ जाएगी। 99 प्रतिशत लोग विकास के आड़े आ रहे अनुच्छेद 370 और 35ए का खात्मा चाहते थे। इस दिन को देखने के लिए पीढ़ियां इंतजार कर रही थीं। हटने के बाद लोग केंद्र सरकार को दुआएं दे रहे हैं। बदलते सियासी इतिहास में इसे जनहित में लिया गया अति महत्वपूर्ण निर्णय बताया जा रहा है। रही बात विकास की तो देखिए, मोदी सरकार का पूरा फोकस इस वक्त इन दोनों केंद्र शासित राज्यों पर है। हालांकि इसे विकास की मुख्य धारा से जोड़ना बहुत बड़ी चुनौती है लेकिन ईमानदारी से काम किया जा रहा है।

देश में 7 केंद्र शासित राज्य पहले से हैं, दो और जुड़ गए। सभी पूर्ण राज्य की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। आपको नहीं लगता कि दोनों में किसी एक को पूर्ण राज्य का शुरुआती दर्जा दिया जाता तो बेहतर होता?

मौजूदा सरकार समान भाव से सभी राज्यों के विकास में लगी हुई है। उप-राज्य हों या पूर्ण राज्य, किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा। मुझे पूर्ण विश्वास है दोनों नए केंद्र शासित क्षेत्र एकाध साल में ही विकासशील राज्यों की कतार में दिखाई देंगे। दोनों जगह उद्योग-धंधे लगाने का खाका तैयार हो चुका है। औषधि बनाने और संबंधित रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए बड़े प्लांट लगाने का निर्णय अंतिम दौर में है। निवेशकों को वहां उद्योग स्थापित करने पर कई तरह की रियायतें दी जाएंगी। अक्टूबर में जम्मूकश्मीर में दो दिनों का इन्वेस्टर्स समिट आयोजित किया जाना है जिसमें दो हजार से ज्यादा उद्योगपति भाग लेंगे। देखते जाइए, मुझे लगता है दो वर्षों के अंदर घाटी की फिजा बदली हुई दिखाई देने लगेगी।

आप संसद में भाषण देकर चर्चा में आए, आपकी पूर्व में उपलब्धियां क्या रही हैं?

राजनीति में अनुभव के बाद इच्छाशक्ति ज्यादा महत्व रखती है। पूर्व की सरकारों में अगर इच्छाशक्ति रही होती तो आज जम्मूकश्मीर इस हालत में नहीं होता और न एक झटके में इतना बड़ा निर्णय लेना पड़ता। जहां तक मेरी अपनी बात है तो राजनीति में आने से पहले मैंने ऑल लद्दाख स्टूडेंट असोसिएशन का चुनाव लड़ा था। विजय हुई। इसके बाद दोस्तों ने कहा कि राजनेता बनने के गुण मुझमें हैं। पर मैं राजनेता कहलाने से पहले सामाजिक कार्यकर्ता कहलाना पसंद करता हूं। मैं लद्दाख के लोगों की आवाज बनना चाहता हूं। चाहता हूं कि हमारे यहां भी आईआईएम, आईआईटी, मेडिकल कॉलेज जैसी सुविधाएं हों ताकि हमारे युवाओं को दिल्ली या दूसरे राज्यों की ओर कूच न करना पड़े। अपने लिए मुझे कुछ नहीं चाहिए, अंतिम सांस तक लद्दाखवासियों के लिए लड़ता रहूंगा।

अनुच्छेद 370 के मुख्य विरोधी अभी नजरबंद हैं। आपको नहीं लगता, जब वे आजाद होंगे तो हंगामा करेंगे?

मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता पर इतना जरूर कहूंगा कि जिनकी तरफ भी आप इशारा करना चाहते हैं उन सबकी सियासी जमीन अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। उनके कुछ भी चाहने या करने से अब कोई फर्क नहीं पड़ना। उनके आका खुद बिलबिला रहे हैं। फिर भी अगर कुछ ऐसी-वैसी हरकतें भविष्य में करने की कोशिश करेंगे तो कानून अपना काम करेगा। जम्मूकश्मीर के चंद सियासी घराने अनुच्छेद 370 को हटाने का विरोध कर रहे हैं। अब उनके पास कुछ नहीं बचा। उनकी हैसियत अब जनता के बीच जाने की भी नहीं रही। वे पार्षदी का भी चुनाव नहीं जीत सकते। जम्मूकश्मीर और लद्दाख की जनता विकास चाहती है। इसके बीच जो भी कोई बाधा बनेगा, वह उसे छोड़ेगी नहीं।

घाटीवासियों का मन आपने कैसे टटोल लिया कि वे अनुच्छेद 370 से आजादी चाहते हैं?

देखिए, लंबे इंतजार के बाद जब कोई चीज मिलती है तो उसकी मान्यता भी बढ़ जाती है। उनकी इस जरूरत को मैं काफी समय से महसूस कर रहा था। बाहर के लोगों को लगता है कि घाटी कोई बिल्कुल अलग चीज है और हम वहां के जीवन से या वहां की जनभावनाओं से बिल्कुल कटे हुए हैं। पर हकीकत में ऐसा नहीं है। मुझे वहां की सचाई भी अच्छी तरह पता है। मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि अनुच्छेद 370 और 35-ए का खात्मा दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों के लिए एक नई सौगात है। उनके लिए अब नई उमंग के साथ जिंदगी का एहसास दिलाने वाले दौर का आगाज हो गया है।