धीरे धीरे हो रहा पोर्टल में सुधार!

 

 

0 जिले का नया इतिहास लिखवा रहा प्रशासन . . . 14

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जिले के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया पोर्टल सैलानियों के लिए दुविधा का सबब बन गया है। इस पोर्टल में कई खामियां हैं। जिन्हें दूर करने के लिए प्रशासन द्वारा कोई खास कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। वहीं दूसरे जिलों के पोर्टल की बात करें तो वहां पर्यटन से जुड़ी लगभग सभी जरूरी जानकारी आसानी से मिल जाती है।

एनआईसी द्वारा तैयार किए गए इस पोर्टल में पहले जिले के सिर्फ डेढ़ दर्जन स्थानों का उल्लेख किया गया था, लेकिन अब इसे बढ़ा कर 28 कर दिया गया है। एक जिला एक पोर्टल के आधार पर सिवनी जिले की भी वेबसाइट तैयार की गई है लेकिन जिसने भी वेबसाइट को तैयार किया है वह जिले से परिचित नजर नहीं आता।

इस वेबसाइट में जिले के पर्यटन स्थलों को तीन श्रेणी में बांटा गया है। जिसमें धार्मिक स्थान, ऐतिहासिक और टूरिस्ट स्थल शांिमल हैं। धार्मिक स्थानों में गुरु रत्नेश्वर धाम दिघौरी, श्रीशिवधाम मठघोघरा, बैनगंगा का उद्गम मुंडारा, बंजारी देवी मंदिर छपारा, वैष्णो देवी मंदिर शीलादेही, अंबामाई मंदिर आमागढ़, रिछारिया बाबाजी मंदिर धनौरा और दिगबंर जैन मंदिर शामिल हैं। इसी प्रकार ऐतिहासिक स्थानों में टुरिया स्मारक, सुधारालय, मिशन स्कूल और पीजी कॉलेज शामिल हैं। इसके अलावा टूरिस्ट केंद्रों में पेंच नेशनल पार्क कर्माझिरी, अमोदागढ़, पायली रेस्ट हाउस, भीमगढ़ बांध, दलसागर तालाब और बबरिया रिजर्वेयर सिवनी का नाम है। इन स्थानों के अलाावा दूसरे महत्वपूर्ण स्थानों का जिक्र दैनिक भास्कर ने अपनी खबरों में लगातार किया। जिसके बाद अब पोर्टल में दस और स्थानों को जोड़ दिया गया है।

प्रशासन द्वारा समाचार प्रकाशन के बाद पोर्टल में कुछ सुधार तो किए गए हैं लेकिन ये अपर्याप्त हैं। इसके साथ ही अब पोर्टल में कुछ फोटो स्टेट पन्नों की तस्वीर मोबाइल से खींचकर अपलोड कर आधी अधूरी जानकारी देने की कोशिश की जा रही हैं। इस पोर्टल में तस्वीरें अस्पष्ट हैं।

इसके साथ ही कहीं भी यह जानकारी नहीं है कि मुसाफिर यहां कैसे पहुंचे, कहां ठहरें, कहां घूमें .. जैसी कोई जानकारी नहीं दी गई है। साथ ही इन जानकारियों का स्त्रोत भी नहीं बताया गया है।