सरे राह बिकती दूषित खाद्य सामग्री

 

 

(शरद खरे)

लगता है सिवनी में अराजकता पूरी तरह हावी हो चुकी है। सरकारी तनख्वाह पाने वाले अधिकारियों कर्मचारियों को मानो अपने कर्त्तव्यों की कोई परवाह ही नहीं रह गयी है। कमोबेश हर विभाग में ही सरकारी कार्य जिस गति और तौर तरीकों से हो रहे हैं उन्हें नियमानुसार तो कतई नहीं माना जा सकता है।

पूर्व में तत्कालीन जिला कलेक्टर भरत यादव के द्वारा अपने कार्यकाल में अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किये जाते रहे पर किसी अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही न होने से अधिकारियों में यह संदेश जाने लगा था कि जिला प्रमुख के द्वारा महज निर्देश ही जारी किये जा रहे हैं, अगर अधिकारी गफलत करें भी तो उनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है।

बारिश का मौसम है। बारिश के मौसम में बीमारियों और संक्रमण फैलने का खतरा दीगर मौसम की अपेक्षा ज्यादा ही रहता है। बारिश के मौसम में दूषित खाद्य सामग्री का सेवन बीमारियों को न्योता देने के लिये पर्याप्त माना जाता है। नगर पालिका के द्वारा महज रस्म अदायगी के लिये ही बारिश के चलते एडवाईजरी जारी की जाती है, किन्तु बाद में नतीजा ढाक के तीन पात ही नजर आता है।

गर्मी के बाद बरसात भी बीतने को है, पर नगर पालिका की फागिंग मशीन अब तक किसी को दिखाई नहीं दी है। बारिश में गंदा पानी नल उगल रहे हैं पर इस मामले में कोई कार्यवाही अब तक नहीं की गयी है। देखा जाये तो दूषित खाद्य सामग्री की जांच के लिये नगर पालिका के पास पृथक से अमला है। इसके साथ ही साथ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के अधीन भी एक अमला कार्यरत रहता है। विडम्बना ही कही जायेगी कि बारिश के चलते भी दोनों ही अमले सड़क पर उतरते दिखायी नहीं दे रहे हैं।

राज्य शासन के निर्देश पर अपमिश्रण के खिलाफ बाकायदा अभियान चलाया जा रहा है। चुने हुए प्रतिष्ठानों पर तो विभाग के द्वारा कार्यवाही की जाकर वाहवाही बटोरी जा रही है पर सड़क किनारे बिकते दूषित खाद्य पदार्थों की ओर किसी का ध्यान न जाना आश्चर्य जनक ही माना जाएगा। याद नहीं पड़ता कि अब तक कभी भी सड़क किनारे बिकने वाली खाद्य सामग्रियों की जांच की गई हो।

शहर भर में दूषित खा़द्य सामग्री धड़ल्ले से बिक रही है। लोग दूषित खाद्य सामग्री, फल आदि खाकर बीमार हो रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतार इस बात का द्योतक है कि सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है जिले में। अगर जांच के लिये पाबंद अमले अपनी जवाबदेहियों का निर्वहन ईमानदारी से नहीं कर रहे हैं तो उन्हें किस बात का वेतन दिया जा रहा है?

भले ही बारिश अब जाने को हो पर संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि बारिश के चलते शहर सहित जिले में दूषित खाद्य सामग्रियों की जांच करवाकर इन्हें बेचने वालों के खिलाफ कठोर कार्यवाही कर नजीर पेश अवश्य करायें ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो सके।