अल्पसंख्यकों की चिंता

 

वाशिंगटन में यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि जब भी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात होगी, तो उनकी सरकार को पाकिस्तान की सबसे समावेशी सरकार के रूप में याद किया जाएगा। तात्कालिक रूप से उन्होंने ऐसे-ऐसे मुद्दे को उठाया, जो हमारे लिए अभी भी समस्या हैं। इस मुद्दे पर चर्चा से पहले हमें यह भी देख लेना चाहिए कि आसिया बीबी की आजादी और सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनकी सरकार की क्या भूमिका रही?

इधर, इमरान खान ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक दिवस के मौके पर भी इस्लामाबाद में स्थानीय श्रोताओं के बीच अपने मत को दोहराया। उन्होंने बलपूर्वक धर्मांतरण कराने की निंदा की। इतिहास इस सरकार को कैसे देखेगा, यह देखना बाकी है, पर इस दिशा में सरकार ने कुछ सकारात्मक कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए, सिख धर्म के संस्थापक की ननकाना साहिब में जयंती मनाई जा रही है और सीमा पार से आते 500 भारतीय सिखों की तस्वीरें आई हैं। इससे यकीनन देश का सम्मान बढ़ेगा कि वह कैसे दूसरों के विश्वास के प्रति सहिष्णुता को बढ़ावा दे रहा है।

दरअसल, इमरान सरकार देश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री ने करतारपुर कॉरिडोर निर्माण की आधारशिला रखी थी। यह कॉरिडोर सिखों के दूसरे सबसे पवित्र धर्मस्थल ननकाना साहिब को डेरा बाबा नानक तीर्थ, गुरुदासपुर (भारत) से जोडे़गा। हाल में, सियालकोट स्थित 1,000 साल पुराने मंदिर को खोलने की घोषणा हुई है। यह1947 से ही बंद है। यह निर्णय इसलिए लिया गया है, क्योंकि सियालकोट में हिंदुओं के लिए कोई पूजा स्थल नहीं है। अल्पसंख्यकों के ज्यादातर पूजा स्थल आजादी के पहले के हैं, और उनमें से अनेक कट्टरपंथियों के निशाने पर रहते हैं। प्रधानमंत्री ने बार-बार दोहराया है कि देश के सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। ऐसे में सिर्फ आशा ही की जा सकती है कि वह इस समानता को सुनिश्चित करेंगे। तभी हम प्रगतिशील पाकिस्तान का सच्चा उत्सव मना सकेंगे। (डॉन, पाकिस्तान से साभार)

(साई फीचर्स)