बंद पड़े सिग्नल्स पर लाखों खर्च!

 

 

(शरद खरे)

भारतीय जनता पार्टी शासित नगर पालिका परिषद को शायद मनमानी करने की अघोषित छूट प्रदाय कर दी गयी है। पालिका की कार्यप्रणाली सालों से जिस तरह की चल रही है उसे देखते हुए यही प्रतीत हो रहा है कि नगर पालिका पर लगाम लगाने की न तो किसी की इच्छा है और न ही किसी का बस चल रहा है भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के ऊपर!

शहर में नवीन जलावर्धन योजना मानो मजाक बनकर रह गई है। इसकी जांच कई बार की गई किन्तु जाँच के बाद किसी तरह की कार्यवाही न होने से यही प्रतीत होता है कि यह महज रस्म अदायगी के लिए की गयी थी, वह भी शायद इसलिये की गयी ताकि लोगों का पनपता आक्रोश शांत किया जा सके। कुछ समय के लिये ही सही पर इस जलावर्धन योजना की जाँच के दौरान लोगों का आक्रोश तो शांत रहा किन्तु जब ठेकेदार के द्वारा एक बार फिर से मनमानी की जाने लगी तो लोगों का आक्रोश फिर पनपने लगा है।

लंबे समय से एक बात और निकलकर सामने आयी है कि नगर पालिका के द्वारा संस्थापना के साथ ही बंद पड़े यातायात सिग्नल्स की मरम्मत के लिये भी भारी भरकम राशि खर्च की गई है। इसके बाद भी शहर के अधिकांश यातायात सिग्नल्स महज ठूंठ के मानिंद ही खड़े दिखाई देते हैं।

वस्तुतः होना यह चाहिये कि इन यातायात सिग्नल्स को संस्थापना के बाद चालू क्यों नहीं कराया गया? इसकी जाँच की जाती। जाँच के बाद इसका भौतिक सत्यापन करने और भुगतान करने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिये थी, किन्तु ऐसा न किया जाकर जब चाहे तब यातायात सिग्नल्स को ही बंद कर दिया जाता है। जैसे तैसे लोग यातायात सिग्नल्स के जरिए नियमों का पालन करना आरंभ करते हैं इसी बीच सिग्नल्स को बंद कर दिया जाता है। बाहुबली चौराहे का यातायात सिग्नल तो दो महीने से ज्यादा समय से बंद ही पड़ा हुआ है।

भाजपा शासित नगर पालिका परिषद में सत्ताधारी अगर इस तरह का काम कर रहे हैं तो भी गलत है पर आश्चर्य तो इस बात पर है कि नगर पालिका में विपक्ष में बैठी काँग्रेस के पार्षद किस कारण से मौन हैं! क्या काँग्रेस के नगर और जिला संगठन का किसी तरह का नियंत्रण इन पार्षदों पर नहीं रह गया है!

पालिका की हरकतों से शहर में भारतीय जनता की साख में बहुत ज्यादा अंतर आ रहा है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है, इसके बाद भी भाजपा संगठन ने अपना मौन नहीं तोड़ा है। कुछ माहों बाद ही नगर पालिका चुनाव होने हैं इसके बाद भी सियासी दलों का मौन आश्चर्य को जन्म दे रहा है।

संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली को देखते हुए किसी तेज तर्रार उप जिला अध्यक्ष को नगर पालिका का प्रभारी अधिकारी बनाकर पालिका की झींगा मस्ती पर रोक लगवाने की कार्यवाही की जाये ताकि नागरिकों को राहत मिल सके।

52 thoughts on “बंद पड़े सिग्नल्स पर लाखों खर्च!

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