पावर प्लांट से वन क्षेत्रों पर क्या पड़ रहा असर!

 

 

हाई कोर्ट ने सीधी सिंगरोली क्षेत्र के लिए दिए निर्देश, सिवनी में भी पड़ रहा होगा असर!

(ब्यूरो कार्यालय)

घंसौर (साई)। देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा आदिवासी बाहुल्य घंसौर क्षेत्र में संचालित कोल आधारित पावर प्लांट से घंसौर क्षेत्र के वन क्षेत्रों पर क्या असर पड़ रहा है इस बारे में वन विभाग को शायद चिंता नहीं है।

ज्ञातव्य है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के द्वारा वन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सीधी जिले के जेपी एवं डीबी पावर प्लांट की वजह से उस इलाके के व, पर्यावरण और वन्यजीवों पर क्या असर पड़ रहा है इसकी जानकारी मुहैया करवाई जाए।

दरअसल, एनजीओ से जुड़े सीधी निवासी सुभाष सिंह ने 2011 में एक जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया कि 2011 में सीधी एवं सिंगरौली जिले में 09 पावर प्लांट्स को वन विभाग ने एनओसी जारी कर दी। जबकि ये सभी पावर प्लांट्स संजय गांधी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में आते थे।

याचिका में एनओसी निरस्त करने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद वन विभाग ने इनमें से 08 पावर प्लांट्स की एनओसी रदद् कर दी थी। अधिवक्ता अनूप सिंह ने कोर्ट को बताया कि अभी भी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में दो पावर प्लांट्स संचालित हैं जिससे वन्य जीवों को एक बड़ा नुकसान हुआ है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक आसपास के इलाके का पूरा ईको सिस्टम ही प्रभावित हुआ। उन्होंने बताया कि पावर प्लांट की फ्लाई ऐश से आसपास के इलाके में लोगों को सांस से संबंधित व अन्य बीमारियां हो रही हैं। तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने वन विभाग व सोन घडिय़ाल सेंचुरी के डायरेक्टर को 02 हफ्ते में अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

यहां यह उल्लेखनीय होगा कि सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील के बरेला में कोल आधारित पावर प्लांट आंरभ किया गया है। इस पावर प्लांट के द्वारा भारी मशीनरी और असुरक्षित तरीके से कोयले का परिवहन किए जाने के चलते घंसौर क्षेत्र की सड़कों के धुर्रे उड़ चुके हैं।

इसके अलावा कोयले का परिवहन भी बिना तिरपाल ढके किए जाने से कोयले के कण हवा में उड़ रहे हैं। संयंत्र से निकलने वाली फ्लाई एश कितनी मात्रा में उत्सर्जित हो रही है! कितनी मात्रा में हवा में उड़कर आसपास जा रही है इस बारे में अब तक किसी सरकारी विभाग के द्वारा आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं बताया गया है।

यहां यह उल्लेखनीय होगा कि बरेला स्थित पावर प्लांट के पास ही विशाल जल संग्रह क्षमता वाला बरगी बांध है। फ्लाई एश उड़कर अगर बरगी बांध की तलहटी में समाकर इसकी जल संग्रहण क्षमता को कम कर रही हो तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए!

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