प्लास्टिक के छोटे टुकड़े पेयजल को पहुँचा रहे नुकसान!

 

 

लंदन में हुए एक अध्ययन में सामने आयी यह बात

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सिवनी शहर में जहाँ देखो वहाँ प्लास्टिक ही प्लास्टिक नज़र आता है। नालियों में पड़े कचरे में सबसे ज्यादा पॉलीथिन ही दिखायी पड़ती है। शहर का कचरा जहाँ भी डंप किया जा रहा है वहाँ प्लास्टिक और अमानक पॉलीथिन के भण्डार दिखायी दे जाते हैं। यह अमानक प्लास्टिक और पॉलीथिन पर्यावारण के साथ ही साथ पेयजल को भी दूषित कर रहे हैं।

नाले-नालियों में मौजूद प्लास्टिक के छोटे टुकड़े जल शोधन प्रक्रिया के दौरान और भी छोटे टुकड़ों में तब्दील हो जाते हैं, जिसका मानव स्वास्थ्य और हमारी जलीय प्रणाली पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। एक अध्ययन में यह दावा किया गया है।

ब्रिटेन की सरे यूनिवर्सिटी और ऑस्ट्रेलिया की डीकिंस यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने जल में और अपशिष्ट जल शोधन प्रक्रियाओं में प्लास्टिक के अति सूक्ष्म एवं छोटे टुकड़ों की जाँच की। शोधार्थियों ने कहा कि माइक्रो प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण के बारे में कई सारे अध्ययन हुए हैं लेकिन जल एवं अपशिष्ट जल शोधन प्रक्रिया से उनका संबंध अब तक पूरी तरह से नहीं समझा गया है।

माइक्रो प्लास्टिक लंबाई में पाँच मिलीमीटर से कम होते हैं। वाटर रिसर्च जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक हर साल वैश्विक स्तर पर लगभग 30 करोड़ टन प्लास्टिक का उत्पादन होता है और उनमें से 1.3 करोड़ टन नदियों और समुद्र में प्रवाहित कर दिया जाता है जिससे 2025 तक लगभग 25 करोड़ टन प्लास्टिक जमा हो जायेगा। चूँकि प्लास्टिक से बनी चीजें समय बीतने के साथ नष्ट नहीं होतीं, इसलिये समुद्री वातावरण में प्लास्टिक का इस तरह से जमा होना एक बड़ी चिंता उत्पन्न करता है। सरे यूनिवर्सिटी के जूडी ली ने कहा कि जल में प्लास्टिक के सूक्ष्म एवं छोटे टुकड़ों की मौजूदगी पर्यावरण के लिये एक बड़ी चुनौती है।

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