हिन्दी दिवस भूला प्रशासन

 

 

(सादिक खान)

सिवनी (साई)। आपाधापी और त्यौहारों की धमक के बीच हिन्दी दिवस की खबर न तो गैर सरकारी संगठनों ने ली और न ही प्रशासनिक स्तर पर ही किसी तरह के आयोजन हुए। सरकारी योजनाओं और अन्य बातों को मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुँचाने वाले जनसंपर्क विभाग ने भी इस मामले में मौन ही साधे रखा।

हिन्दी दिवस को भुला दिये जाने पर साहित्यकारों ने नाराज़गी जाहिर की और इस भाषा के महत्व को समझाते हुए कहा कि देश की आज़ादी में हिन्दी के आंदोलन को लेकर अलख जगाने वाले पुरषोत्तम दास टंडन की स्मृति में प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला हिन्दी दिवस पर हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिये जाने को लेकर लगातार प्रयास होते रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य है कि हिन्दी को लेकर आज जिस तरह से सियासत चल रही है, उसको लेकर ऐसा प्रतीत होता है, कि मानो हिन्दी हाशिये पर खड़ी हो।

साहित्यकारों ने बताया कि बीते वर्ष हिन्दी दिवस को मनाने के लिये जिस तरह से राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास हुए थे, उससे ऐसा प्रतीत होता था कि जल्द ही हिन्दी को खोया हुआ सम्मान वापस मिल जायेगा। विडंबना है कि बीते वर्ष देश के प्रधानमंत्री ने प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस दिवस को शान के साथ मनाया था। ठीक एक वर्ष बाद सिवनी जिले में हिन्दी दिवस के अवसर पर एक भी प्रतिष्ठान ऐसा नहीं है, जहाँ पर इस दिवस को मनाये जाने की पहल की गयी हो। यहाँ तक कि सत्ता पर आसीन लोगों ने भी हिन्दी सेवियों का सम्मान तो दूर की बात, उन्हें कार्यक्रम आयोजित कर बुलाना भी उचित समझा।

हिन्दी को सभी भाषाओं की जननी कहा जाता है और जिस तरह से परिवार में माँ का स्थान होता है, उसी तरह भाषाओं में हिन्दी को माँ का गौरव प्राप्त है। उन्होंने आगे कहा कि दुर्भाग्य है कि अबला हिन्दी को आज दोयम दर्जे पर खड़ा कर दिया गया है। लोग इसका उपयोग तो करते हैं, लेकिन सम्मान की बात आती है तो इसे नकार देते हैं।

हिन्दी दिवस पर काँग्रेस, भाजपा सहित अन्य दलों से जुड़े लोगों के द्वारा सोशल मीडिया पर तो हिन्दी दिवस को लेकर तरह तरह के पोस्ट डाले गये पर सिवनी शहर में हिन्दी दिवस पर मिशन उच्चतर माध्यमिक शाला के अलावा किसी अन्य संस्था में इसे मनाये जाने की जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पायी है।

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