अधिवक्ता रहेंगे 23 से 28 तक हड़ताल पर

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

जबलपुर (साई)। प्रदेश के वकील आगामी 23 से 28 सितम्बर तक हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान कोई भी वकील किसी भी अदालत में पैरवी करने नहीं जाएगा। इसके स्थान पर एकजुट होकर प्रदर्शन किया जाएगा।

आंदोलित वकील सातों दिन अदालत परिसरों में धरना देने के साथ राज्य शासन, केन्द्र शासन, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पांचों न्यायाधीशों के नाम जिला जज या तहसील स्तर पर अपर जिला जज, न्यायिक दंडाधिकारी को ज्ञापन सौपेंगे। इसके जरिए हाईकोर्ट में स्थायी चीफ जस्टिस की नियुक्ति, एमपी एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू किए जाने व हाईकोर्ट में जजों के रिक्त पद भरे जाने की मांग को बल दिया जाएगा।

स्टेट बार सभाकक्ष में प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान चेयरमैन शिवेन्द्र उपाध्याय ने उक्त जानकारी दी। इस दौरान सदस्य दिनेश नारायण पाठक, राधेलाल गुप्ता, आरके सिंह सैनी व प्रतापचन्द्र मेहता मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि पूर्व में अनिश्चितकालीन आंदोलन का प्रस्ताव तैयार किया गया था। लेकिन अधिवक्ता संघों से विमर्श के बाद प्राथमिक रूप से आंदोलन को सात दिवसीय हड़ताल के रूप में सीमित कर दिया गया। इसके लिए हाईकोर्ट बार, हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार व जिला बार सहित अन्य के पदाधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक आहूत की गई थी।

28 सितम्बर के बाद आंदोलन को संचालित करने समिति गठित : चेयरमैन शिवेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि एक सप्ताह की हड़ताल 28 सितम्बर को सम्पन्न् होगी। इसके बाद आंदोलन को संचालित करने के लिए एक समिति गठित की गई है, जिसमें हाईकोर्ट बार अध्यक्ष रमन पटेल को संयोजक व महाधिवक्ता शशांक शेखर को सह संयोजक बनाया गया है।

जबकि अन्य सदस्यों में अतिरिक्त महाधिवक्ता ग्वालियर अंकुर मोदी, अतिरिक्त महाधिवक्ता इंदौर रविन्द्र सिंह छाबड़ा, जिला अधिवक्ता संघ जबलपुर के अध्यक्ष सुधीर नायक, सचिव राजेश तिवारी, हाईकोर्ट बार सचिव मनीष तिवारी, हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार अध्यक्ष मनोज शर्मा, भोपाल बार अध्यक्ष डॉ.विजय कुमार चौधरी, इंदौर हाईकोर्ट बार के लोकेश भटनागर, जिला बार इंदौर के सुरेन्द्र वर्मा, ग्वालियर बार के विनोद भारद्वाज, जिला बार रीवा के राजेन्द्र पांडे, सागर बार के अंकलेश्वर दुबे, सतना बार के राजबहादुर सिंह, उज्जैन बार के राजेश यादव, शहडोल बार के दिनेश दीक्षित को स्थान दिया गया है।

शनिवार को स्टेट बार द्वारा अधिवक्ता संघों की संयुक्त बैठक आहूत की गई, जिसमें मेरे द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल के प्रस्ताव का विरोध किया गया। जबकि एक सप्ताह की हड़ताल के प्रस्ताव का इस शर्त के साथ समर्थन किया गया कि एक बार हड़ताल शुरू होने के बाद किसी भी आश्वासन के आधार पर बीच में वापस नहीं ली जाएगी। यदि ऐसा किया गया तो स्टेट बार के सभी 25 सदस्यों को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देना होगा। इस बार लड़ाई आर-पार की है, इसलिए तीनों मांगों के पूरे होने की स्थिति में ही प्रदेश के वकील आंदोलन समाप्त करेंगे।

परितोष त्रिवेदी,

वरिष्ठ उपाध्यक्ष,

हाईकोर्ट बार.

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