हठधर्मिता के कारण धड़ों में बंटती दिख रही काँग्रेस!

 

 

कोतवाली में की जनपद अध्यक्ष प्रतीक्षा ने बीडीओ खातरकर की शिकायत

(अपराध ब्यूरो)

सिवनी (साई)। जनपद पंचायत की तत्कालीन प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी रहीं सुमन खातरकर का शनि भारी होता दिख रहा है। सुमन खातरकर पर पद का दुरूपयोग करते हुए एक करोड़ 68 लाख रूपये के भुगतान की शिकायत जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमति प्रतीक्षा राजपूत के द्वारा कोतवाली में की गयी है।

कोतवाली के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी की जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतीक्षा बृजेश राजपूत ने प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी रहीं मूलतः विकास खण्ड अधिकारी सुमन खातरकर के खिलाफ कोतवाली पुलिस से शिकायत की है।

सूत्रों ने बताया कि प्रतीक्षा ने बीडीओ सुमन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मनरेगा अंतर्गत 1.68 करोड़ रूपये का भुगतान कर वित्तीय अनियमितता की है। उन्होंने यह भुगतान उस समय किया जब जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में रामकिशन कोरी पदस्थ थे।

जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतीक्षा ब्रजेश राजपूत द्वारा बीडीओ की शिकायत किये जाने के बाद राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती दिख रही हैं। इस मामले को लेकर काँग्रेस ही दो धड़ों में बंटी नज़र आ रही है। काँग्रेस के अंदरखाने से छन-छन कर बाहर आ रहीं खबरों पर अगर यकीन किया जाये तो एक धड़ा सुमन खातरकर को बचाने का प्रयास कर रहा है तो वहीं दूसरा धड़ा उनके द्वारा कथित तौर पर किये गये भुगतान के मामले में उन पर कार्यवाही चाह रहा है।

काँग्रेस के एक नेता ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि जिले में काँग्रेस धड़ों में बंटी नज़र आ रही है। एक धड़े को अधिकारियों के द्वारा पूरी रतह तवज्जो दी जा रही है जबकि दूसरे धड़े को जनहित के काम करवाने में ऐड़ी चोटी एक करना पड़ रहा है।

बहरहाल सूत्रों ने बताया कि जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतीक्षा राजपूत ने अपनी शिकायत में कहा है कि पूर्व में प्रभारी मुख्य कार्य पालन अधिकारी रही विकास खण्ड अधिकारी सुमन खातरकर ने 24, 25 व 26 अगस्त को मनरेगा अंतर्गत एक करोड़ 68 लाख रूपये का फण्ड ट्रांसफर ऑर्डर (एफटीओ) बनाकर खुद को ही सीईओ दर्शाते हुए कर दिया गया है, जबकि इस अवधि में पूर्णकालिक मुख्य कार्यपालन अधिकारी के बतौर राम किशन कोरी पदस्थ थे।

सूत्रों ने कहा कि अपनी शिकायत में उन्होंने यह भी कहा है कि इस भुगतान की जानकारी उनके द्वारा सीईओ आर.के. कोरी को भी नहीं दी। इस मामले पर जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रस्ताव भी पारित किया गया है।

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