पानी में डूबी रेलवे अण्डरब्रिज़ की सड़कें

 

 

(शरद खरे)

सिवनी जिले में अमान परिवर्तन का काम जारी है। भले ही यह काम मंथर गति से जारी हो पर इस काम का अधीक्षण उचित तरीके से नहीं किया जा रहा है। इसका प्रमाण बारिश के दिनों में अण्डरब्रिज़ की सड़कों में पानी भरने से मिल रहा है। मीडिया में लगातार ही इन बातों को प्रमुखता से उठाये जाने के बाद भी इसमें सुधार की कवायद न किया जाना आश्चर्य जनक ही माना जायेगा।

छिंदवाड़ा से सिवनी होकर नैनपुर, नैनपुर से मण्डला और बालाघाट के बीच नैरोगेज़ से ब्रॉडगेज़ अमान परिवर्तन का काम जारी है। इसके अलावा जबलपुर से नैनपुर तक अमान परिवर्तन का काम पूरा हो चुका है। इन सभी रेल खण्डों में बनाये गये कमोबेश हर अण्डरब्रिज़ में सड़क को सतह से नीचे ही बनाया गया, अथवा बनाने का ताना बाना बुना जा रहा है।

सिवनी में रेलवे की इंजीनियरिंग पता नहीं किस तरह काम कर रही है कि रेलवे अण्डरब्रिज़ की सड़कों में बारिश के पानी को किस तरह निकाला जायेगा इसकी कोई मुकम्मल व्यवस्थाएं नहीं की जा रही हैं। वर्तमान में घंसौर क्षेत्र में बनाये गये अण्डर ब्रिज़ की सड़कें जरा सी बारिश में ही तालाब के मानिंद नज़र आने लगती हैं।

इसके अलावा हाल ही में हुई बारिश में कान्हीवाड़ा क्षेत्र के अण्डरब्रिज़ में भी कमोबेश इसी तरह की स्थितियां देखने को मिली हैं। ऐसा नहीं है कि रेलवे के द्वारा पहली बार ही अण्डरब्रिज़ का निर्माण कराया जा रहा हो। देश भर में हजारों, लाखों स्थानों पर अण्डरब्रिज़ बने हैं किन्तु वहाँ इस तरह की स्थितियां शायद निर्मित नहीं होती हैं।

वर्तमान में कटंगी नाके पर भी एक अण्डरब्रिज़ का निर्माण कराया जा रहा है। इस अण्डरब्रिज़ की ऊँचाई देखकर यही लग रहा है कि यहाँ भी सड़क को अपेक्षाकृत नीचे से ही गुजारा जायेगा। अगर ऐसा हुआ तो यहाँ भी बरसात के समय पानी भर सकता है। अभी इसका निर्माण चल ही रहा है तो इस मामले में कुछ सुधार किया जा सकता है।

देखा जाये तो अण्डरब्रिज़ की ऊँचाई अगर बढ़ा दी जाये तो अण्डरब्रिज़ के नीचे की सड़क और अण्डरब्रिज़ की निचली सतह के बीच पर्याप्त स्थान मिल सकेगा और यहाँ पानी नहीं भर पायेगा। अगर इनका निर्माण पूरा हो गया तो बाद में रेल की पातों को ऊपर उठाने में भारी मशक्कत करना पड़ सकता है।

रेलवे के तकनीकि प्रभाग के अधिकारियों को यह देखना चाहिये कि अण्डरब्रिज़ की सड़क के आसपास भरने वाले पानी को किस तरह निकाला जायेगा! इसके लिये अभी से ही मुकम्मल व्यवस्थाएं करना जरूरी हैं। तकनीकि प्रभाग के अधिकारियों के द्वारा संभवतः इस बात को नज़र अंदाज ही किया जा रहा है, जिसके चलते आये दिन अण्डरब्रिज़ में पानी भर रहा है।

रेल के अमान परिवर्तन का काम मण्डला संसद सदस्य फग्गन सिंह कुलस्ते और बालाघाट के सांसद डॉ.ढाल सिंह बिसेन के संसदीय क्षेत्र में हो रहा है। रेलवे चूँकि केंद्र का मसला है और केंद्र में अपनी बात वजनदारी से रखने के लिये ही जनता ने इन दोनों को जनादेश दिया है, इस लिहाज़ से दोनों ही सांसदों का यह नैतिक दायित्व है कि वे अपने-अपने संसदीय क्षेत्र में इस तरह की विसंगतियों पर रेल मंत्री का ध्यान आकर्षित कराते हुए इसमें वांछित सुधार के मार्ग प्रशस्त करवायें। अगर एक बार इनका निर्माण हो गया और इन पर रेल की पातें डल गयीं तब इन कमियों को दुरूस्त करवाने में ऐड़ी चोटी एक करना होगा, इसलिये समय रहते ही यह काम करवा लिया जाये तो उचित होगा।

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