कुलांचे भर रहे भारी वाहन

 

मुझे शिकायत यातायात जैसे विभागों से है जिनकी अनदेखी के चलते शहर में समय बेसमय भारी वाहन अत्यंत तेज रफ्तार में दौड़ रहे हैं जिनसे गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।

सिवनी मेें इन दिनों बारिश का दौर जारी है उसके बाद भी भारी वाहनोें की रफ्तार पर इस बारिश का कोई असर होता नहीं दिख रहा है। बारिश के दौरान दृश्यता कम होना स्वाभाविक है, इसलिये भारी वाहनों की रफ्तार पर अंकुश तो लगाया ही जाना चाहिये। यहाँ रफ्तार पर अंकुश की बात इसलिये लिखी गयी है क्योंकि नो एंट्री के समय भी इन वाहनों को प्रवेश दिया जा रहा है जिसे रोका जाना इसलिये संभव नहीं क्योंकि यह कार्य जिनके मत्थे सौंपा गया है वे ही चंद रूपयों की खातिर इन वाहनों को शहर में प्रवेश करने दे देते हैं।

देखने वाली बात यह भी है कि पूर्व में प्रशासन के द्वारा भारी वाहनों के लिये दिन के समय प्रवेश पर रोक लगा दी गयी थी लेकिन कुछ व्यापारियों ने अपने मुनाफे और घाटे की दुहाई दे-देकर नो एंट्री के समय में से कुछ घण्टे की छूट प्राप्त कर ली। इसे दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि उन व्यापारियों के लिये इंसानी जिंदगी से ज्यादा महत्व उनके व्यापारिक फायदे का है जिसकी आड़ में वे भारी वाहनोें का प्रवेश उस समय शहर में करवाने में सफल हो गये जबकि यातायात का दबाव अपने चरम पर हुआ करता है।

भारी वाहनों को प्रवेश की अनुमति देते समय प्रशासन का दबाव में आना भी समझ से परे है। व्यापारियों को यदि दिन के समय भारी वाहनों को प्रवेश न करने देने पर दिक्कत थी तो प्रशासन को उस समस्या को किसी और तरीके से हल किया जाना चाहिये था न कि नागरिकों की सुरक्षा दांव पर लगा दी जाती। व्यापारियों को भी एक बार फिर विचार करना चाहिये कि यदि उनके व्यापारिक लाभ-हानि को दूसरे नंबर पर रखते हुए नागरिकों के जीवन को प्रमुख स्थान दिया जाये तो क्या दिन के समय शहर में भारी वाहनों का प्रवेश उचित माना जा सकता है।

बहरहाल, जब प्रवेश दिया ही जा रहा है तो कम से कम इनकी रफ्तार पर अंकुश लगाये जाने की दिशा में कदम उठाये जाना चाहिये ताकि सड़क और सड़क किनारे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अभी-अभी समाचार माध्यमों से जानकारी मिली कि बण्डोल क्षेत्र में एक मासूम को डंपर के द्वारा कुचल दिया गया जिसकी बाद में मौत हो गयी। इस तरह की दुर्घटनाओं को सिवनी वासी आखिर कब तक झेलते रहेंगे, विचारणीय है।

अनीस अहमद

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