फुहारों का दौर रहेगा जारी!

 

 

चार सिस्टम सक्रिय, झमाझम की संभावनाएं भी!

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। अपेक्षाकृत सूखे सावन के बाद भादों में बदरा इस कदर बरसे कि साल भर का बारिश का कोटा पूरा हो गया है। अब लोग त्राहिमाम त्राहिमाम करते नज़र आ रहे हैं। आने वाले दिनों में फुहारों के संकेत तो मिल रहे हैं, पर चार सिस्टम अभी भी सक्रिय होने से बारिश की संभावनाओं से इंकार भी नहीं किया जा सकता है।

मौसम के बदले मिजाज के बीच बुधवार के बाद ब्रहस्पतिवार को भी बादलों ने सिवनी पर रहम ही किया। दिन भर काले बादलों को देख लोग सशंकित रहे, पर छुटपुट बूंदाबादी के बाद लोगों को सुकून मिला। वहीं, दिन में खिली चटक धूप के कारण उमस ने लोगों को हलाकान कर दिया। लंबे समय बाद निकली धूप में लोगों के घरों के कपड़े बाहर सूखते दिखे।

मौसम विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र कमजोर पड़ गया है लेकिन, गुजरात के सौराष्ट्र से महाराष्ट्र होते हुए पश्चिम बंगाल तक एक द्रोणिका बनी हुई है। उसके प्रभाव के साथ ही स्थानीय बादलों की सक्रियता से बारिश की संभावनाएं तो बन रही हैं, पर सब कुछ हवा की तीव्रता और रूख पर निर्भर करता है।

सूत्रों के अनुसार द्रोणिका का असर अभी बना हुआ है। वहीं, बंगाल की खाड़ी और उससे लगे आंध्र प्रदेश के ऊपरी क्षेत्र में गुरुवार को एक कम दबाव का क्षेत्र निर्मित होने का अनुमान है। यह सिस्टम बुधवार तक शहर के मौसम को प्रभावित कर सकता है।

धूप खिली, उमस से परेशान हुए लोग : पिछले कुछ दिनों से चल रहा भारी बारिश का दौर थम गया है। सिवनी में लोगों को बारिश से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन उमस से लोग फिर बेहाल होने लगे हैं। गुरुवार को दिन में चटक धूप खिली तो लोग खुश हुए, लेकिन थोड़ी देर में ही वे गर्मी और उमस से परेशान होने लगे।

चार और सिस्टम सक्रिय : सूत्रों के मुताबिक पूर्वी – पश्चिमी द्रोणिका सौराष्ट्र से बंगाल की खाड़ी तक बनी है। जो महाराष्ट्र, तेलंगाना, कोस्टल आंध्र प्रदेश से होकर गुजर रही है। बंगाल की खाड़ी एवं उससे लगे दक्षिणी आंध्र प्रदेश तटीय क्षेत्र पर हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है। इसके कम दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना है। दक्षिण मध्य प्रदेश में हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है। साथ ही दक्षिण मध्य प्रदेश से बंगाल की खाड़ी तक एक द्रोणिका तटीय आंध्र प्रदेश तक हवा के ऊपरी भाग में बनी हुई है।

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