फुलारा टोल नाके पर भय का वातावरण!

 

सिवनी से छिंदवाड़ा जिले की सीमा पर स्थित टोल नाके से मुझे शिकायत है जहाँ निहायत ही गुण्डागर्दी के साथ वाहनों से शुल्क वसूला जाता है जिससे उस क्षेत्र से गुजरते समय वाहन चालकों के मन में अंजाना डर सा बैठा रहता है और पुलिस कुछ नहीं कर पा रही है।

फुलारा के समीप स्थित इस टोल बूथ पर गुण्डागर्दी के साथ वसूली कोई नयी बात नहीं है और आये दिन समाचार माध्यमों में इस टोल नाके की शिकायतें भरी मिलती हैं लेकिन इस टोल नाके पर व्याप्त गुण्डागर्दी पर लगाम कसने की किसी भी संबंधित की कोई मंशा नहीं दिखायी देने के कारण लोगों में निराशा है। अनुभव के आधार पर यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि जिस तरह की गुण्डागर्दी इस फुलारा टोल नाके पर है वह किसी अन्य टोल नाके पर किसी को भी नहीं मिलेगी।

बताया जाता है कि यह टोल नाका सिवनी के लखनवाड़ा थाना क्षेत्र में आता है। इस तरह यह कहा जा सकता है कि लखनवाड़ा पुलिस की पूरी शह इस टोल नाके को प्राप्त होगी तभी वहाँ पर टोलकर्मी के रूप में गुण्डे तैनात किये गये हैं जो वाहन चालकों के साथ अभद्रता करने की कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। यदि किसी वाहन मेें महिला सवार है तो फिर तो इस नाके पर तैनात गुण्डों के हौसले देखने वाले ही होते हैं जिससे आम वाहन चालक थर्राता हुआ सहमा सा दिखता है।

सिर्फ वाहन चालक ही नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का भी कहना है कि इस टोल नाके के कर्मचारी जब कभी फुरसत में होते हैं तो वे उनके गाँवों में आकर हुड़दंग बरपाते हैं। यदि लखनवाड़ा पुलिस की शह इस टोल के कर्मियों को प्राप्त नहीं है तो फिर तो यह शोध का ही विषय माना जा सकता है कि यहाँ तैनात गुण्डों के हौसले आखिर इतने बुलंद क्यों हैं कि वे हर किसी से अभद्रता करने से बाज नहीं आते हैं।

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडिया भी इसी टोल नाके का फिर वायरल हुआ। इस बार किसी महिला अधिकारी को परेशान होते हुए क्लिप में देखा गया। बताया जाता है कि चूँकि मामला सरकारी महकमे से जुड़ा हुआ था इसलिये कुछ कर्मचारी रूपी गुण्डों को जेल की हवा खिलवा दी गयी लेकिन इससे स्थायी समाधान नहीं होने वाला क्योंकि कर्मचारी तो आये दिन बदलते रहते हैं, बात तो तब है जब कर्मचारियों के रूप में गुण्डों को यहाँ तैनात करने वाले जिम्मेदार को जेल की हवा खिलवायी जाये। कुल मिलाकर इस क्षेत्र से गुजरने वाले वाहन चालकों के मन से भय को समाप्त किया जाना चाहिये।

धनंजय सिंह

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