पितृदोष की पहचान कर करें दूर!

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। ज्योतिष शास्त्र में कुण्डली के नवम भाव को पूर्वजों का स्थान माना गया है। वहीं नवग्रह में सूर्य स्पष्ट रूप से पूर्वजों के प्रतीक माने जाते हैं। किसी व्यक्ति की कुण्डली में सूर्य को बुरे ग्रहों के साथ स्थित होने से या फिर बुरे ग्रहों की दृष्टि से अगर दोष लगता है तो यह पितृदोष कहलाता है।

ज्योतिषाचार्यों के अुनसार इसके अलावा कुण्डली के नवम भाव या इस भाव के स्वामी को कुण्डली के बुरे ग्रहों से दोष लगता है तो भी यह पितृ दोष कहलाता है। पितृ दोष हर व्यकक्ति की कुण्डली में अलग – अलग तरह का प्रभाव डालता है।

यह भी हैं पितृदोष के कारण : गरुड़ पुराण के अनुसार, परिवार में किसी की अकाल मृत्यु हो जाये तो ऐसी व्यक्ति की आत्मा मुक्ति न पाकर मृत्यु लोक में भटकती हैं तो ऐसा होने पर उस परिवार के सदस्यों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। शास्त्रों में बताया गया है कि जिन परिवार के लोग पितरों की पूजा और श्राद्ध नहीं करते हैं, उन्हें भी पितृ दोष लगता है।

पितरों का न करें अपमान : ज्योतिषाचार्यों के अनुसार किसी व्याक्ति के द्वारा यदि किसी समाधि या फिर कब्र का अपमान किया जाये। पीपल के पेड़ पर पूर्वजों का वास माना जाता है। ऐसे में पीपल के पेड़ को काटने या फिर उसके नीचे अशुद्धि फैलाने से भी पितृ दोष लगता है। पिता या माता की मृत्यु के बाद जो भी जीवित हों उनका अनादर नहीं करना चाहिये। इनके अनादर से मृत व्यक्ति की आत्मा अशांत रहती है।

ऐसे पहचानें पितृ दोष : ज्योतिषाचार्यों की मानें तो घर में लगातार धन की कमी बने रहना, धन की हानि होते रहना, शादी में परेशानी आना, परिवार में कलह रहना, घर में किसी न किसी का बीमार रहना। अगर इनमें से कोई भी समस्या लगातार बनी हुई है तो आपको पितृ शांति के उपाय करने चाहिये।

श्राद्ध कर्म करना है जरूरी : ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पितृ दोष को दूर करने के लिये किसी भी अमावस्या, पूर्णिमा या पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म किया जा सकता है। ऐसा करने से पितृ तृप्त होकर अपने वारिसान को समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं और सफलता की राहें सुगम बनाते हैं।

करें पशुओं की सेवा : अगर किसी को पितृ दोष है तो उन्हें गाय की सेवा करना चाहिये। इसके लिये किसी भी गरीब व्यक्ति की गाय की एक साल तक सेवा करने का संकल्प लें। उस गाय के लिये साल भर के चारे की व्यवस्था कर दें। चिड़ियों को बाजरे के दाने डालें और कौवों को रोटी डालें।

अमावस्या पर करें यह उपाय : हर अमावस्या को किसी मंदिर में रसोई का राशन या फिर दूध का दान करें। गाय को हरा चारा डालें। निर्धन व्यक्ति को वस्त्रों का दान करें।

गृहिणी करें यह कार्य : रोजाना स्नान के बाद ही भोजन पकाएं और सबसे पहले गौ माता के लिये पहली रोटी निकालकर उस पर गुड़ रखकर खिलाना चाहिये। घर में पीने के पानी के स्थान को हमेशा साफ – सुथरा रखें। इसे पितरों का स्थापन माना जाता है।