मक्के की फसल पर अतिवृष्टि का साया!

 

 

काँग्रेस भाजपा संगठनों के मौन से आहत हैं अन्नदाता किसान!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। किसान कल्याण विभाग और मौसम विभाग के बीच तालमेल के अभाव के चलते किसान अंदाज से ही जिले में फसलों की बोवनी करने पर मजबूर हैं। बारिश के पहले अनुमान के हिसाब से ही किसानों ने मक्के की फसल लगायी पर सावन में पर्याप्त बारिश न होने के कारण किसान आसमान की ओर ताकता रहा।

भादों मास की शुरूआत में बेहतर बारिश होने से किसानों की उम्मीद जागी, पर भादों मास में बारिश ने अपना जो रौद्र रूप दिखाया उससे किसानों की पेशानी पर चिंता की लकीरें दिखायी देने लगीं। किसानों की मानें तो लगातार बारिश के कारण मक्के की फसल पर ग्रहण का साया मण्डराता दिख रहा है। यद्यपि यह बारिश धान के लिये वरदान साबित होती दिखी।

किसानों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि उनकी जो जमीन नदी नालों के किनारे थी, वह भादों माह में लगभग पूरे समय ही पानी में डूबी रही, जिससे फसल पूरी तरह तबाह हो चुकी है। किसानों के अनुसार उनकी साठ से सत्तर फीसदी मक्के की फसल तबाह ही हो चुकी है।

किसानों की मानें तो जिले में पहले सोयाबीन की फसल सबसे ज्यादा लगायी जाती थी, किन्तु कुछ सालों से सोयाबीन से किसानों का मोहभंग हुआ है और अब किसान मक्के की फसल लगाकर इससे भरपूर लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं। मक्के की फसल के लिये जिले की आबोहवा उचित भी प्रतीत हो रही है।

किसानों के अनुसार लगातार हुई बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसानों ने यह भी बताया कि उनके द्वारा फसलों का बीमा कराया गया था, किन्तु उनकी खराब हुई फसल का सर्वेक्षण करने अब तक कोई भी जिम्मेदार नहीं पहुँचा है। किसानों के द्वारा राजस्व विभाग के अमले को भी इसकी सूचना दे दी गयी है किन्तु उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ और हासिल नहीं हुआ है।

किसानों ने यह भी बताया कि बारिश के साथ ही किसानों के द्वारा छिड़काव किये गये कीटनाशक रसायन भी बह चुके हैं, जिससे कीट व्याधियों का प्रकोप आरंभ हो गया है। कीट का प्रकोप बढ़ रहा है जिससे अब तबाह हुई फसल का रकबा अगर बढ़ जाये तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये।

किसानों के मुताबिक इस साल भादों मास में हुुई ज्यादा बारिश के चलते अब उनकी मक्के की फसल पीली पड़ती दिख रही है। जहाँ – जहाँ अभी भी पानी भरा है वहाँ फसल या तो बढ़ी नहीं हैं या गल चुकी हैं। जहाँ फसल बढ़ी भी हैं वहाँ फसलें सूख रहीं हैं। इतना ही नहीं जो मक्का पका भी है उसके दाने बहुत ही सख्त आ रहे हैं।

जिले के अन्नदाता किसानों ने इस बात पर हैरानी जतायी है कि चुने हुए सांसद, विधायकों के अलावा प्रमुख सियासी दल काँग्रेस और भाजपा के नुमाईंदों के द्वारा भी किसानों की तबाह हुई फसलों के संबंध में अब तक आवाज बुलंद नहीं की गयी है। सियासतदारों के मौन से किसान आहत ही नज़र आ रहा है।

किसानों ने जिला प्रशासन से अपेक्षा व्यक्त की है कि जिले भर में राजस्व अधिकारियों के जरिये फसलों का सर्वेक्षण तत्काल कराया जाकर उन्हें मुआवजा दिलवाने की कार्यवाही को अंजाम दिया जाये। जब तक सर्वेक्षण नहीं हो जाता किसान दुबारा अपने खेत में फसल की बुआई नहीं कर सकते।

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