आधा करोड़ सालाना डकार रहे स्कूल!

 

 

मरम्मत और स्कूल फण्ड में हो रहा घालमेल!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। शालाओं को मरम्मत और स्कूल फण्ड के नाम पर हर साल दस से पंद्रह हजार रूपये की राशि का क्या उपयोग किया जा रहा है? सालों से इस बारे में पूछने की जहमत शिक्षा विभाग के द्वारा नहीं उठायी गयी है।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिले की प्राथमिक, माध्यमिक शालाओं के साथ ही साथ हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूलों को हर साल दस से पंद्रह हजार रूपये की राशि शालाओं में रंग रोगन, मरम्मत एवं स्कूल फण्ड के नाम पर दी जाती है।

सूत्रों ने बताया कि जिले में लगभग पाँच सौ शालाएं हैं, इस लिहाज़ से अगर यह मान लिया जाये कि प्रत्येक शाला को इस मद में दस हजार रूपये ही प्रदाय किये जाते हैं तो यह राशि पचास लाख रूपये सालाना की होती है। सूत्रों ने बताया कि इस राशि का शाला प्रबंधन के द्वारा क्या उपयोग किया जाता है इस बारे में शिक्षा विभाग अब तक मौन ही है।

इसके साथ ही सूत्रों की मानें तो स्कूल फण्ड की मद में हर शाला को हर साल पाँच हजार रूपये की राशि प्रदाय की जाती है। इस राशि का उपयोग शाला प्रबंधन के द्वारा राष्ट्रीय पर्व के साथ ही साथ अन्य आयोजनों में मिष्ठान वितरण आदि के लिये किया जाता है। इसके अलावा शाला में अगर अन्य गतिविधियां आयोजित की जाती हैं तो वे इस मद से राशि लेकर ही की जाती हैं।

सूत्रों ने बताया कि इसी तरह शाला भवन के रंगरोगन और मरम्मत की मद में पाँच से दस हजार रूपये की राशि हर साल शालाओं को प्रदाय की जाती है। सूत्रों की मानें तो इस राशि का शाला प्रबंधन के द्वारा क्या उपयोग किया जाता है, इस बारे में शायद ही कोई जानता हो।

इसी तरह सूत्रों ने बताया कि जिले के ग्रामीण अंचलों की अनेक शालाओं की जर्जर हालत देखकर यह प्रतीत होता है कि इन शालाओं की मरम्मत और रंग रोगन सालों से नहीं किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा अगर एक दल का गठन किया जाकर इन शालाओं का भौतिक सत्यापन करवा लिया जाये तो पता चलेगा कि सालों से इन शालाओं की मरम्मत और रंग रोगन की मद में आयी राशि को इन शालाओं पर खर्च ही नहीं किया गया है!

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