आधुनिक जीवनशैली मे तेजी से बिगडता जा रहा मानसिक स्वास्थ

 

 

(विश्व मानसिक स्वास्थ दिन विशेष – 10 अक्टूबर पर विशेष)

(डॉ. प्रितम भि. गेडाम)

मनोविकार किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ की वह स्थिति है जिसे किसी स्वस्थ व्यक्ति से तुलना करने पर सामान्य नही कहा जाता। इसे मानसिक रोग कहते है। मानसिक अस्वास्थ्यता दुनियाभर में तेजी से बढती एक बडी समस्या है। मानसिक रोगों से ग्रस्त लोगों को हमारे समाज मे अलग नजरीये से देखते है और उनसे समाज मे लोग अजीब बर्ताव करते है। छोटी-मोटी मनोवैज्ञानिक बीमारीयों के रोगीयों का अक्सर दूसरे लोग मजाक उड़ाते नजर आते हैं। मानसिक बीमारीयों के प्रति लोगो ने अपना रवैया बदलना चाहिए। ये बीमारीयाँ उतनी ही वास्तविक होती हैं जितनी की शारीरिक बीमारीयाँ। मानसिक रोग ग्रस्त व्यक्ति को सहानभूती की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है क्योकी अच्छे मानवी व्यवहार से ही मनोरोगी को बेहतर इलाज मे मदत होती है।

आजकल स्कूली बच्चो मे भी डिप्रेशन की समस्या लगातार बढती जा रही है बच्चों में घर छोडकर जाने और सुसाइड की घटना पहले से ज्यादा है जब कि बच्चों में डिप्रेशन की वजह बहुत छोटी-छोटी होती हैं। घर मे कलह का माहौल, पालको की उम्मीदों पर खरे न उतरना, बच्चो की जीद पुरी न करना, बच्चों की तुलना करना, मां-बाप के आपसी खराब संबंध बच्चो पर बुरा प्रभाव डालते है जिस कारण डिप्रेशन की समस्याएँ बच्चो मे बढ रही है।

आधुनिक जीवनशैली और प्रदूषित वातावरण के कारण मनोरोगी बढे

आज हर तरफ भागमभाग और प्रतियोगी बनकर सब लोग दौड रहे है हर किसी को शाॅटकर्ट तरीके से आगे निकलना है, संयुक्त परिवार से अलग होकर छोटे-छोटे घरो मे लोग शिफ्ट हो रहे है। बच्चे शिक्षा और युवा रोजगार के लिए दूर जा रहे है। परीवार मे संस्कार परंपरा बंधन की डोर शिथील हो गई है। महिलाओ, बडे बुजुर्गो के प्रति आदर भाव कम हो रहा है और सबसे बडी बात यह है की लोग इंसानियत को भूलकर स्वार्थप्रवृत्ती के हो रहे है हर कोई सिर्फ खुद के लिए ही सोचते है लेकीन अपना समाज, अपने लोग, अपना पर्यावरण जैसा नही सोचते है अर्थात परोपकार की भावना शून्य हो रही है। फिर ऐसे प्रदूषित वातावरण, नशा, धोखा, अपमानजनक बाते या व्यवहार, दूसरो से अधिक अपेक्षाएँ रखना, बढती जिम्मेदारीयाँ, समझदार हमदर्द की कमी, निराशा, परेशानी, मुश्किलो मे घबराना या जल्द हार मान जाना, देर रात तक जागना, पौष्टिक व संतुलीत आहार की कमी, परीवार मे योग्य मार्गदर्शक की कमी जैसी बाते मनुष्य को मनारोगी बनाती है। आज के वर्तमान समय मे मनुष्य क्षणिक सुख के चक्कर मे भटक रहा है, मानव चिडचिडा, गुस्सैल हो रहा है, मानव जल्दी धौर्य खो देते है सहनशिलता की अत्यंत कमतरता नजर आती है।

मानसिक रोग के कुछ प्रकार

बाइपोलर डिसआर्डर, अल्जाइमर, मनोभ्रम पार्किंसन, आटिज्म, डिस्लेक्सिया, अवसाद, तनाव, चिंता, लत संबंधी विकार, मनोग्रसित बाध्यता विकार, पोस्ट ट्राॅमेटिक स्ट्रैस डिसआॅर्डर, यारदाश्र्त खोना, भूलने की बिमारी, डर अर्थात फोबिया, भ्रम, मतिभ्रम व अन्य-

तनाव सबसे बडा कारण बनता जा रहा है मानसिक रोगो का

टेंशन लेना किसी समस्या का हल नही होता है फिर भी लोग परेशान रहते है। अगर आप किसी पर गुस्सा होते या नाराज होते है तो वह क्रिया भी आप के ही स्वास्थ पर दुष्परिणाम करती है और अधिकतर गंभीर बिमारीयो की जड भी तनाव ही है। मनुष्य का मन कभी भी स्थिर नही होता। अपनी आवश्यकताओ को सिमित नही रख पाता और ऐसे लोग कभी समाधानी नही होते। मन मे दुनियाभर के विचार चलते रहते है छोटी-छोटी समस्याओ को भी गंभीर रूप देते है। बहुत टेंशन लेते है की समस्या का निवारण कैसे होगा? क्या होगा? क्या करेंगे? मन के मन मे हजारो उलझने खुद ही पैदा करके खुद को उलझा लेते है और अंदर ही अंदर मनुष्य संकुचित होता जाता है फिर नकारात्मक विचार मनुष्य के मन मे घर कर जाते है, ऐसे लोग परीवार अपनो से कतराने लगते है जिसके कारण वह धीरे-धीरे मानसिक विकार की ओर अग्रसर होते जाते है आज के प्रदूषित, शोर शराबे और अशुद्ध वातावरण मे मनुष्य का मन स्वस्थ व शांत नही रहता साथ ही हमारी जीवनशैली भी इसके लिए उत्तरदायी है।

विश्वस्तर पर भारत देश मानसिक चिकीत्सा सुविधा मे बहुत पिछे

मेंटल हास्पिटल के मामले मे विकसीत देशो की तुलना मे एक लाख आबादी पर औसतन 0.04 हास्पिटल है जब की हमारे देश मे 0.004 ही है। विश्व स्वास्थ संगठन की रिपोर्ट 2011 अनुसार देश मे स्वास्थ बजट का महज 0.06 प्रतिशत भाग ही मानसिक स्वास्थ पर खर्च होता है जब की बाग्लादेश जैसे देश भी अपने स्वास्थ बजट का 0.44 प्रतिशत भाग मानसिक स्वास्थ पर खर्च करते है। देश मे मानसिक रोग चिकीत्सक की भी बहुत कमी है भारत मे 10 लाख आबादी पर केवल एक मनोचिकीत्सक है राष्ट्रमंडल देशो के मुकाबले यह 18 गुणा कम है। मानसिक रोगो के इलाज मे लोग डरते है, वे सोचते है की लोग उनके बारे मे क्या सोचेंगे? रोगीयो को उचीत समय पर इलाज नही मिल पाता। मानसिक स्वास्थ सर्वेक्षणनुसार मानसिक रोगो से ग्रस्त 99 प्रतिशत मरीज उपचार को जरूरी नही मानते जिसके कारण समाज मे ऐसे मरीजो की संख्या बढती ही जा रही है।

मानसिक बीमारी के कुछ लक्षण

मानसिक रोगो का इलाज मुमकिन है लेकीन सही वक्त पर मरीज को उचित इलाज मिले।

लंबे समय से आप खुलकर हंसी-खुशी के पल इंजाॅय नही कर पा रहे हो और जीने मे उत्साह नही लगता।

जीवन मे रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी आपको कोई बडी चुनौतीपुर्ण लगते है।

अपनो से या लोगो से मिलना टालते है या खुद को अलग-थलग महसूस करते है और हर बार किसी भी समस्या के लिए खुद को ही दोषी मानते है।

खुद के प्रति हमेशा नकारात्मक विचार करते है और खुद को ही एक परेशानी समझते है। अपनेआप मे ही खोये हुए रहते है और जीवन के प्रति निराशावादी नजरीये से देखते है तो आप जल्द मनोचिकीत्सक से मिले।

मानसिक तनावमुक्त जीवन जीने के लिए

नशे जैसी बुरी आदतो से दुरी बनाये, चिकीत्सा करना, डाॅक्टरो से खुलकर बाते करना, मन मे उत्पन्न सवालो का तज्ञो द्वारा निराकरण करना।

टीवी पर रोने-धोने वाले, दुखद, कलह करनेवाले सीरीयल से दूर रहे यह आपके मन को प्रभावित करते है, जैसा देखते है वैसा महसूस करते है अगर आप हसी-खुशी के सीरीयल देखेंगे तो आपका मन प्रसन्न रहेगा।

अकेलेपन मे ना रहे, दुसरो से अपने मन की बात करे, संभव हो तो हमेशा परिवार के बिच मे रहे।

नींद पुरी करे, लेट नाईट पार्टीयो से दूर रहे, पौष्टिक व संतुलित आहार ले, सकारात्मक सोच व स्वाभीमान के साथ जिंदादीली से जिये और मन मे निस्वार्थ परोपकार की भावना जगाये क्योकी यह परोपकार की भावना मन को शांति और सुकून देती है की हम कुछ अच्छा कर रहे है।

खुद की देखभाल करना, ध्यानसाधना करना, अपने नये खेलकूद, योग, व्यायाम व शौक विकसीत करना, तनाव को हेल्दी तरीके से निपटाएँ, खाली समय मे भी खुद को व्यस्थ रखे, लिखने व पढते रहने की आदत डाले।

विशेष रूप मे पालको ने अपने बच्चो से एक दोस्त के रूप मे व्यवहार करना, उनपर नियंत्रण रखना, बचपन से ही बच्चो को उचीत अनुचीत बातो की समझ देना, अच्छे संस्कार, उचित वातावरण का निर्माण कर देना एंव महिलाओ व बडे-बुजुर्गो का सम्मान करना सिखाना।

मन मे नकारात्मक भाव ना लाये, अपने परिवार के सदस्यो, उनकी खुशीयो, अपने कर्तव्यो को समझे। पशू-पक्षी से स्नेह करे, खुद को प्रकृति के करीब लाये, पर्यावरण व सामाजिक जिम्मेदारी भी समझे, दुनिया बहुत खुबसूरत है लेकीन देखने का हमारा नजरीयाँ भी वैसा ही होना चाहीए।

शारीरिक स्वास्थ के साथ हमेशा मानसिक स्वास्थ का भी ख्याल रखे, मानसिक अस्वस्थ व्यक्ती की मदत करे। अच्छे विचारो द्वारा प्रेरित करनेवाले व्यक्तीयो, समूहो, दोस्तो से संपर्क मे रहना और खुद को हमेशा व्यस्थ रखना।                                                

 

(साई फीचर्स)

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