यात्री बस किराया आसमान पर!

 

 

(शरद खरे)

त्यौहारों, मेलों ठेलों के अवसर पर सिवनी आने जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना इसलिये करना पड़ता है क्योंकि अमान परिवर्तन के चलते नैरोगेज़ लाईन को उखाड़ दिया गया है। ब्रॉडगेज़ का काम मंथर गति से चल रहा है। सिवनी आने जाने के लिये अब लोग सिर्फ और सिर्फ सड़क मार्ग पर चलने वाले वाहनों पर ही निर्भर हैं। इन वाहनों का किराया भी अक्सर चार से पाँच गुना हो जाता है।

पिछले कुछ सालों से यात्री बस की बुकिंग ऑनलाईन आरंभ हो गयी है। ऑनलाईन व्यवस्था के कारण यात्री बस के संचालकों के द्वारा अघोषित तौर पर फ्लेक्सी फेयर लागू कर दिया जाता है। त्यौहारों की तारीख जैसे-जैसे समीप आती है ऑनलाईन बुकिंग करवाने पर यात्रियों को निर्धारित से तीन चार गुना ज्यादा किराया अदा कर सफर करने पर मजबूर होना पड़ता है।

संचार क्रांति के युग में मोबाईल पर भी यात्री बस की बुकिंग के लिये अनगिनत एप भी मोबाईल के प्ले स्टोर्स में उपलब्ध हैं। इनके जरिये बुकिंग कराने पर यात्रियों की जेब तराशी होती है। ऐसा नहीं है कि इन सारी बातों से परिवहन विभाग और यातायात पुलिस अनभिज्ञ हो। परिवहन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों सहित यातायात पुलिस और जिला पुलिस बल के अफसरान से लेकर सिपाही तक सभी सोशल मीडिया पर लगभग बारह घण्टे तो सक्रिय दिखते हैं।

मजे की बात तो यह है कि ऑनलाईन बुकिंग में उन यात्री बसों की बुकिंग सीना ठोककर की जाती है जो यात्री बस स्टेट कैरिज की बजाय नेशनल या टूरिस्ट परमिट पर संचालित होती हैं। यक्ष प्रश्न यह है कि टूरिस्ट परमिट पर संचालित होने वाली यात्री बस में जगह-जगह सवारी बैठाने और उतारने की छूट परिवहन विभाग के द्वारा कैसे प्रदाय कर दी जाती है!

अभी दीपोत्सव के त्यौहार में एक पखवाड़ा बाकी है। वर्तमान में रेड बस नामक एप या वेब साईट में अगर नागपुर से सिवनी तक की बुकिंग करवायी जाये तो किराया 600 रूपये से 1500 रूपये तक दर्शा रहा है, जबकि वास्तविक किराया महज़ 130 रूपये है। इसके अलावा भोपाल से सिवनी का किराया 800 से 1100 दर्शा रहा है जबकि वास्तविक किराया महज 400 रूपये ही है।

दरअसल, परिवहन विभाग, यातायात पुलिस सहित अन्य थानों के द्वारा इस तरह से यात्रियों को सरेआम लूटने वाले बस संचालकों के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही न किये जाने के कारण यात्री बस संचालकों के हौसले बुलंदी पर हैं। परिवहन विभाग के द्वारा अगर समय-समय पर इसके खिलाफ मुहिम चलायी जाकर कार्यवाही की जाये तो संभव है कि इस तरह की लूट को रोका जा सकता है। एक बात और समझ से परे ही है कि अगर इस तरह से बस संचालकों को लूटने की अघोषित छूट प्रदाय की जा रही है तो फिर मार्गों पर किराया निर्धारण की औपचारिकता क्यों!

इस मामले में जन प्रतिनिधियों का मौन भी आश्चर्य जनक ही माना जा सकता है। संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह और जिला पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक से जनापेक्षा है कि वे स्व संज्ञान से इस मामले में उचित कार्यवाही करें ताकि वसूला जा रहा मनमाना किराया देने से यात्री बच सकें।