जगह-जगह बेखौफ परोसी जा रही शराब!

 

 

सड़क किनारे मिलता है खुला और उन्मुक्त माहौल

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। अंग्रेजी शराब दुकानों के साथ संबद्ध अहाते सरकार के द्वारा सालों से बंद करवा दिये गये हों, पर जिले भर के होटल ढाबों सहित सड़कों पर भी मयज़दों को खुलेआम शराब परोसी जा रही है और आबकारी विभाग हाथ पर हाथ रखे बैठा ही दिख रहा है।

शहरी सीमा से सटे ढाबों में खुले आम शराब मिल रही है। इसके साथ ही पीने वालों को खुला माहौल भी मिल रहा है। कथित तौर पर व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा के चलते शराब ठेकेदार एक दूसरे के क्षेत्र में आने वाले ढाबों से शराब बिकवा रहे हैं। यह सब स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की अघोषित शह से ही हो रहा है।

प्राप्त जानकारी के अुनसार शाम ढलते ही, शहर से सटे जबलपुर रोड, नागपुर रोड, नये पुराने बायपास, छिंदवाड़ा रोड, मण्डला एवं बालाघाट रोड पर स्थित ढाबों में शराब के शौकीन पहुँचना आरंभ हो जाते हैं। ढाबों में ऑर्डर करते ही मनपसंद ब्रांड की शराब हाजिर हो जाती है।

खास बात यह है कि यहाँ पर शराब की दरों में छूट (कंसेशन) भी मिलता है। नियमित रूप से आने वालों के लिये खास इंतजाम भी किये जाते हैं। पुलिस का कथित संरक्षण प्राप्त होने की वजह से देर रात तक शराबियों की महफिल जमती हैं। ढाबों में शराबियों की महफिल जमने से परिवार के साथ जाने वालों ने ढाबों में जाना ही छोड़ दिया है। अक्सर ढाबों से शराब पीकर उपद्रव करने की भी खबरें आती रहती हैं, लेकिन पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करती है।

बताया जाता है कि ढाबों में माल वाहक वाहन चलाने वाले ड्राईवरों के लिये देशी शराब का इंतजाम किया जाता है। ड्राईवरों के पहुँचते ही उनके लिये शराब के साथ खाना हाजिर हो जाता है। इसके एवज में ढाबा संचालक अतिरिक्त राशि वसूल रहे हैं। इसका खामियाजा उन ढाबा संचालकों को भुगतना पड़ रहा है, जो शराब नहीं बेचते हैं। दूसरी ओर ढाबों में शराब पीने के बाद वाहन चलाने से दुर्घटनाओं का खतरा सदैव बना रहता है।

बताया जाता है कि शराब ठेकेदार अपने वाहन से ढाबे तक शराब पहुँचा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि शराब ठेकेदार अपने क्षेत्र से बाहर के ढाबों में शराब सप्लाई करते हैं। शराब सस्ती मिलने की वजह से ढाबा संचालकों को इसमें ज्यादा मुनाफा होता है। ज्यादा शराब खपत करने वाले ढाबा संचालकों को अलग से भी रकम दी जाती है। इसके साथ ही पुलिस और आबकारी से सेटिंग कराने का काम भी शराब ठेकेदार करते हैं।

बताया जाता है कि गाहे बेगाहे पुलिस और आबकारी के अधिकारी ढाबों में छापामार शैली में जाँच करते हैं। जानकारों का कहना है कि जाँच के पहले ही ढाबा संचालकों को खबर कर दी जाती है। इससे कभी भी ढाबों में शराब नहीं मिलती है। जाँच के बाद फिर शराब बिकने का दौर आरंभ हो जाता है।

मजे की बात तो यह है कि पुलिस और आबकारी विभाग के लोग कई बार शराब पकड़ लेते हैं, लेकिन कभी भी यह पता नहीं चलता है कि शराब की सप्लाई कौन कर रहा है। इसकी वजह से कभी भी शराब ठेकेदारों का नाम सामने नहीं आ पाता है। शराब ठेकेदार बेखौफ होकर अवैध रूप से ढाबों और अन्य स्थानों पर शराब सप्लाई करते रहते हैं।