अस्पताल से सामग्री चोरी!

 

 

(शरद खरे)

अस्सी के दशक के पूर्वाद्ध में अस्तित्व में आये सिवनी के इंदिरा गांधी जिला अस्पताल में इन दिनों ऑपरेशन कायाकल्प जारी है। इस अभियान के तहत जनसहयोग से अस्पताल की रंगत बदलने का प्रयास किया जा रहा है। जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा किये गये प्रयास आकार भी लेते दिख रहे हैं, पर अस्पताल प्रशासन के नाकारापन के चलते इस अभियान में पलीता भी लगता दिख रहा है।

हाल ही में यह बात सामने आयी है कि जिन वार्ड्स में रंग रोगन कराया जाकर यहाँ के वाशरूम (लेट्रिन, बाथरूम) को सुधारा गया था उनमें से अधिकांश में लगाये गये नल और शॉवर चोरी हो गये हैं। इसकी शिकायत भी वार्ड के प्रभारियों के द्वारा सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक से लिखित तौर पर की जाकर, नल और शॉवर लगाने की बात भी कही गयी है।

इस मामले में समाचारों के प्रकाशन के बाद भी सदा की ही तरह अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का मौन अब तक नहीं टूटा है, जिससे यह बात साबित होती दिख रही है कि इन बातों में सत्यता तो है। अगर अस्पताल के अंदर से सामग्री चोरी हुई है तो यह मामला संगीन है।

देखा जाये तो ये नल और शॉवर जनता के सहयोग से संकलित धन से ही लगाये गये थे, इस लिहाज़ से इनकी चोरी की शिकायत पुलिस में दर्ज करवायी जाना चाहिये थी। अभी तक अस्पताल प्रशासन के द्वारा इस तरह की कोई कवायद नहीं की गयी है, इससे लगता है कि अस्पताल प्रशासन भी इस बात को बहुत ही हल्के रूप में ले रहा है।

जिला अस्पताल में सफाई और सुरक्षा के काम को आऊट सोर्स किया गया है। इसके लिये हर माह सफाई और सुरक्षा का काम करने वाली ठेकेदार कंपनी को लाखों रूपये का भुगतान भी किया जा रहा है। अस्पताल के वाशरूम की सफाई का काम सफाई ठेकेदार का है। अगर वहाँ से नल और शॉवर गायब हुए हैं तो निश्चित तौर पर इसकी जानकारी सफाई ठेकेदार के द्वारा अस्पताल प्रशासन को उसी समय दी जाना चाहिये थी।

इसके अलावा अस्पताल की सुरक्षा के लिये जिम्मेदार कंपनी से भी इस चोरी के लिये पूछताछ या पत्राचार किया जाना चाहिये था। बताते हैं कि अस्पताल प्रशासन के द्वारा सुरक्षा का काम देख रही ठेकेदार कंपनी से भी इस संबंध में पूछताछ नहीं की गयी है। एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आयी है कि जिलाधिकारी के अस्पताल के निरीक्षण के पूर्व ही चोरी गये नल और शॉवर्स को दुबारा लगा दिया गया है। यक्ष प्रश्न यही है कि दूसरी बार लगाये गये नल और शॉवर्स का भोगमान किसने भोगा!

नियमानुसार इस चोरी के लिये अस्पातल की सुरक्षा एजेंसी को जवाबदेह माना जाना चाहिये और इसकी बकायदा जाँच करवायी जाकर सुरक्षा ठेकेदार से इसकी वसूली की जाना चाहिये। अस्पताल को सीसीटीवी की जद में रखा गया है। सीसीटीवी के जरिये यह बात आसानी से पता की जा सकती है कि चोरी के वक्त वाशरूम में कौन गया था!

संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह और अस्पताल के प्रभारी श्री श्यामवीर से जनापेक्षा है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच करवायी जाकर इसके लिये दोषियों पर कार्यवाही की जाये ताकि यह नज़ीर बने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

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