कलेक्टर के आदेश हवा में उड़ाती पालिका!

 

 

(शरद खरे)

पता नहीं भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के द्वारा नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाने में कोताही क्यों बरती जा रही है। आश्चर्य तो इस बात पर भी होता है कि पालिका में विपक्ष में बैठी काँग्रेस के द्वारा भाजपा शासित नगर पालिका के क्रिया कलापों पर मौन क्यों साधा रखा गया है! काँग्रेस का जिला और नगर संगठन भी इस मामले में पूरी तरह मौन ही नज़र आ रहा है। जब ज्यादा चीख पुकार होती है तो एकाध ज्ञापन सौंपकर संगठन के द्वारा अपने कर्त्तव्यों की इतिश्री समझ ली जाती है। अब तो प्रदेश में काँग्रेस की सरकार बैठे नौ माह से ज्यादा समय बीत चुका है, तब तो काँग्रेस संगठन को भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के क्रिया कलापों की जाँच अवश्य करायी जाकर नागरिकों का भरोसा जीतने का प्रयास करना चाहिये था, क्योंकि तीन बार से नगर पालिका परिषद पर भाजपा का कब्जा बरकरार है।

इस साल के आरंभ में जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा नवीन जलावर्धन योजना का काम 01 मार्च तक पूरा करने के निर्देश दिये गये थे। इसी तरह पिछले साल निर्दलीय एवं वर्तमान में भाजपा के विधायक दिनेश राय के द्वारा भी 01 मार्च 2018 से नवीन जलावर्धन योजना से लोगों को पानी दिये जाने की बात कही गयी थी। विधायक दिनेश राय द्वारा तय की गयी समय सीमा से 593 एवं जिलाधिकारी के द्वारा तय की गयी समय सीमा से 228 दिन ज्यादा हो गये हैं।

यह योजना काँग्रेस के लिये प्रतिष्ठा का प्रश्न इसलिये भी मानी जा सकती है क्योंकि इस योजना के लिये तत्कालीन शहरी विकास मंत्री और वर्तमान में प्रदेश काँग्रेस अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री कमल नाथ के द्वारा केंद्र से इमदाद दिलवायी गयी थी। इस योजना में जिलाधिकारी के द्वारा तय की गयी समय सीमा के उपरांत योजना का लोकार्पण काँग्रेस के संगठन को मार्च में ही करवा दिया जाना चाहिये था।

विडंबना ही कही जायेगी कि काँग्रेस संगठन के द्वारा भी अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं मुख्यमंत्री की इस सौगात को अब तक न तो पूरा करने के लिये किसी तरह का दबाव बनाया गया है और न ही इस योजना को जनता को समर्पित करवाने की कवायद की गयी है।

इस योजना में अब तक कितना काम पूरा हुआ है! इसमें विस्तृत प्राक्कलन के हिसाब से क्या काम होने थे! अगर डीपीआर से हटकर काम कराये गये हैं तो क्या उसकी विधिवत अनुमति परिषद एवं राज्य सरकार के द्वारा दी गयी है! इस योजना के पूर्ण होने में विलंब क्यों और किसकी गलती से कारित हुआ है! इस तरह के प्रश्न अभी भी अनुत्तरित ही हैं, जिससे प्रतीत हो रहा है कि प्रदेश में सत्ता में भले ही काँग्रेस आ चुकी हो पर काँग्रेस का संगठन जनता के बीच अपनी उपलब्धियों और जनता को होने वाली कठिनाईयों के लिये दोषियों पर कार्यवाही करने से कतरा ही रहा है!

इसके अलावा जिलाधिकारी के द्वारा 04 अक्टूबर को सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में नगर पालिका को निर्देशित किया गया था कि छः दिनों (10 अक्टूबर तक) शहर के यातायात सिग्नल आरंभ करवा दिये जायें। विडंबना ही कही जायेगी कि 14 अक्टूबर तक पालिका के द्वारा इन सिग्नल्स को आरंभ नहीं करवाया गया है। इस लिहाज़ से यही प्रतीत हो रहा है कि भाजपा शासित नगर पालिका के द्वारा पूर्व जिलाधिकारियों के द्वारा दिये गये निर्देशों की तरह ही वर्तमान जिलाधिकारी के निर्देशों को भी हवा में ही उड़ाने की हिमाकत की जा रही है।