कॉपी पेस्ट डीपीआर है दुर्घटनाओं का कारण!

 

 

0 सिवनी का ट्रामा केयर सेंटर . . . 3

नहीं बचा कोई धनी धोरी फोरलेन का, पीडी ऑफिस आये सिवनी में वापस

(सादिक खान)

सिवनी (साई)। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में फोरलेन पर लगा ग्रहण हटने के बाद भी जिले से होकर गुजरने वाली फोरलेन के निर्माण और रखरखाव में कोताही बरती ही जा रही है। छपारा से लखनादौन के बीच हो रही दुर्घटनाओं का एक कारण रोड सेफ्टी को दरकिनार कर बनाया गया डीपीआर और एस्टीमेट बताया जा रहा है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इंडियन रोड काँग्रेस स्पेसिफिकेशन पब्लिकेशन 84 (आई.आर.एस.एस.पी. 84) के तहत वर्ष 2009 के पहले फोरलेन निर्माण के समय पब्लिक सेफ्टी के मामले में किसी तरह का कोई पब्लिकेशन नहीं किया गया था।

इसके बाद 2009 में पहला प्रकाशन किया गया था। 2014 में इस पब्लिकेशन को पुनः रिवीजन किया गया जिसमें सड़क पर पब्लिक सेफ्टी और सुविधाओं में इज़ाफा किया गया था। इस आधार पर सिवनी जिले का रिवाईज्ड एस्टीमेट 2014 के पब्लिकेशन को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिये था।

एनएचएआई के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को आगे बताया कि सिवनी जिले के लखनादौन से छपारा के बीच के मार्ग के लिये जो रिवाईज्ड एस्टीमेट विभाग को मिला था वह वर्ष 2005 में विभाग द्वारा बनाये गये डीपीआर का ही हिस्सा था। इसमें पब्लिक सेफ्टी और सुविधाओं को 2014 के पब्लिकेशन के हिसाब से नहीं बनाया गया था।

सूत्रों का कहना है कि इस एस्टीमेट को देखकर यही प्रतीत हो रहा था कि यह पुराने रोड सेफ्टी के मानकों को ही कॉपी पेस्ट कर दिया गया था। उस दौरान यह बात उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाये जाने के बाद भी किसी के द्वारा इस पर ध्यान नहीं दिया गया।

सूत्रों ने आगे बताया कि इस मार्ग पर बनाये गये विस्तृत प्राक्कलन (डीपीआर) एवं एस्टीमेट में सुविधाओं को उसी तरह रखा गया था जो 2005 या उससे पहले थीं, जबकि इन्हें 2016 के हिसाब से नये सिरे से सर्वेक्षण कराकर बढ़ाया जाना चाहिये था।

सूत्रों ने यह भी कहा कि सड़क के इस हिस्से के निर्माण के दौरान एनएचएआई के अधिकारियों और एनएचएआई के द्वारा नियुक्त किये गये कंसल्टेंट के द्वारा भी पूरे समय सड़क की निगरानी नहीं किये जाने से ठेकेदार कंपनी के द्वारा मनमाने तरीके से इसका निर्माण करवा दिया गया है।

सूत्रों ने कहा कि सड़क के इस हिस्से की जाँच के लिये प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी विभाग सहित उन विभागों जिनके द्वारा सड़क निर्माण कराया जाता है के मुख्य अभियंताओं की एक पैनल बनाकर इसका तकनीकि परीक्षण कराया जाना चाहिये एवं इसमें खामी मिलने पर निर्माण के दौरान पदस्थ रहे अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही की जाना चाहिये।

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