एसी ट्रायवल से हुआ विवाद बिल भुगतान का या . . .

 

 

जय जंगो दाई संघर्ष समिति के ज्ञापन में है डीज़ल पंप के भुगतान का जिकर!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। शहीद दिवस पर कुरई विकास खण्ड के टुरिया में आयोजित शहीद मेला के दौरान काँग्रेस के नेताओं और आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त के बीच हुआ विवाद थमता नहीं दिख रहा है। आदिवासी समाज के बीच इस मामले को लेकर राख अभी भी गरम ही दिख रही है।

काँग्रेस के द्वारा इस विवाद के पीछे एक आदिवासी महिला कर्मचारी को न्याय दिलाने की बात कही गयी है तो दूसरी ओर जय जंगो दाई संघर्ष समिति के द्वारा गत दिवस दिये गये ज्ञापन में स्पष्ट तौर पर इस घटनाक्रम के पीछे कुरई विकास खण्ड के एक व्यापारी के द्वारा जनजातीय कार्य विभाग में प्रदाय किये गये डीज़ल पंप की सप्लाई के भुगतान की बात कही गयी है।

बताया जाता है कि इसके उपरांत जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त एस.एस. मरकाम और काँग्रेस के एक नेता के बीच कथित तौर हुए विवाद की लगभग स्वीकारोक्ति के साथ दो विज्ञप्तियां सोशल मीडिया पर वायरल हुईं थीं, इन विज्ञप्तियों में विवाद को आपस में सुलझाने की बात भी कही गयी थी।

एक के बाद एक हुए घटनाक्रमों के साथ ही काँग्रेस के द्वारा जारी विज्ञप्ति और जय जंगो दाई संघर्ष समिति के द्वारा दिये गये ज्ञापन और सहायक आयुक्त एस.एस. मरकाम के द्वारा कथित तौर पर जारी की गयी विज्ञप्ति के उपरांत भी इस मामले में न तो सहायक आयुक्त का अधिकारिक बयान आया है और न ही काँग्रेस के जिला या कुरई के ब्लॉक अध्यक्ष की ओर से ही कुछ कहा गया है।

इधर, आदिवासियों के हित संवर्धन का दावा करने वाली विपक्ष में बैठी भाजपा के संगठन सहित भाजपा के विधायकों और सांसदों ने भी इस मामले में अपना मौन नहीं तोड़ा है। आदिवासियों के बीच भाजपा के मौन की प्रतिक्रिया भी बहुत अच्छी नहीं मानी जा रही है।

सियासी जानकारों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम बरघाट विधान सभा क्षेत्र में हुआ है। इस लिहाज़ से इस मामले में बरघाट के काँग्रेसी विधायक सहित बरघाट से भाजपा की टिकिट पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी का बयान भी आना चाहिये था। विडंबना ही कही जायेगी कि दोनों ही ने इस मामले में अपनी चुप्पी अब तक नहीं तोड़ी है।

इसके साथ ही एक बात और सियासी फिजा में तेजी से तैर रही है कि इस मामले के शमन के लिये आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों के द्वारा भी तरह – तरह के जतन किये जा रहे हैं। इसमें काँग्रेस और भाजपा के नेताओं की जुगलबंदी की चर्चाएं भी हो रही हैं।

चर्चाओं के अनुसार जनजातीय कार्य विभाग में होने वाले कार्यक्रमों में व्यक्ति विशेष के इशारे पर ही केटरिंग का ठेका भी दिया जाता है, जिसके चलते पर्दे के पीछे से इस काम को करने वाले भी सक्रिय हो चुके हैं।

चर्चाएं तो यहाँ तक हैं कि जिले में जनजातीय कार्य विभाग के द्वारा लगाये जाने वाले सोलर पेनल्स का ठेका भी काँग्रेस और भाजपा के नेताओं के द्वारा मिलकर लिया जाने का ताना बाना बुना जा रहा है। चर्चाओं पर अगर यकीन किया जाये तो पूरा का पूरा बखेड़ा इसी ठेके को हासिल करने के लिये खड़ा किया गया था। इस बारे में कितनी सच्चाई है यह तो नहीं कहा जा सकता है किन्तु जिस तरह से जिला स्तर के काँग्रेस और भाजपा के विज्ञप्तिवीर और नेता शांत हैं उससे इस तरह की चर्चाओं में कुछ हद तक सच्चाई प्रतीत हो रही है।