वर्षावास के सत्संग से मिलती है दुर्गुणों से मुक्ति : भंते महानाम

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सत्संग से हमेशा मन की शांति और प्रेरणा मिलती है किन्तु वर्षावास के सत्संग से विशेष लाभ होता है। ग्रीष्मकाल में धरती और समस्त प्राणी व्याकुल हो उठते हैं। वर्षा होते ही सबकी व्याकुलता समाप्त हो जाती है। इसी प्रकार वर्षावास के सत्संग से दुर्गुणों से मुक्ति मिलती है, सद्गुणों का उदय होता है, यह तथागत गौतम बुद्ध की महत्वपूर्ण धम्मदेशना है।

उक्ताशय के विचार गत दिवस नगर के सिद्धार्थ बुद्ध विहार में आयोजित 63वें धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस एवं वर्षावास संपन्न होने पर भारत के प्रसिद्ध भंते महाथेरो महानाम नागपुर ने व्यक्त किये। ज्ञातव्य है कि गत 15 जुलाई से प्रारंभ 03 माह के वर्षावास के दौरान भंतेजी नगर में भ्रमण करते हुए बौद्ध उपासकों को धम्म देशना देते रहे।

उनके साथ अनेक बौद्ध उपासक भी रहे, किंतु सिद्धार्थ बौद्ध विहार के संरक्षक एवं रविदास शिक्षा मिशन के संरक्षक डॉ.एल.के. देशभरतार ने भंते महाथेरो महानाम की सेवा की। उनका सानिध्य प्राप्त हुआ। इस दौरान सिद्धार्थ बौद्ध विहार के अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में विशेष सहयोग दिया।

तथागत गौतम बुद्ध और बाबा साहब डॉ.भीमराव अंबेडकर के प्रति उनके समर्पण को देखते हुये भंते महानाम द्वारा कार्यक्रम में डॉ.एल.के. देशभरतार को समाज भूषणके रूप में प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और शाल भेंटकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में भंते जयमंगल मंडी, भंते बुद्धपाल कटंगी और भंते ज्ञानदीप बरघाट भी उपस्थित रहे। इन्होंने भी सैकड़ों बौद्ध उपासक – उपासिकाओं को धम्मदेशना देकर डॉ.अंबेडकर के मिशन पर प्रकाश डाला।