जीत और उत्सव, अमेरिका से लाइव!

 

(हरी शंकर व्यास)

मानो अमेरिका में अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन हो रहा हो। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र में जमा विश्व नेता जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमृत वचन सुनने को बेकरार हों। वैश्विक थानेदार या रेफरी अमेरिका से दुनिया जानेगी कि अनुच्छेद 370 समाप्त मतलब पाकिस्तान की पराजय घोषित और जम्मू कश्मीर का मसला खत्म। सोचें, इस तरह का मैसेज अमेरिका में हजारों अमेरिकी भारतीयों की भीड़ में मोदी, मोदी के जयकारे और डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को गले लगाने से यदि टीवी चौनलों पर लाइव उत्सव के रूप में जब दिखेगा तो जीत का क्या वह तिलकोत्सव नहीं होगा?

सो, जान लें कि 21 से 27 सितंबर 2019 की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा उनके दूसरे कार्यकाल का पहला सबसे बड़ा वह प्रायोजित उत्सवी कार्यक्रम है, जिसे देख भारत में हम लोग इस सुकून में, इस जीत की खुशी में बम-बम होंगे कि अनुच्छेद 370 का जम्मू कश्मीर से पाप मिटा और देखो इसकी शाबाशी में दुनिया के नेता भारत के लिए कैसी तालियां बजा रहे हैं! पाकिस्तान की जनता को मिर्ची लगेगी और मोदी सरकार का यह प्रचार-प्रसार (रविवार को) अमेरिका के ह्यूस्टन शहर के फोटो शूट, लाइव शूट के प्रमाण के साथ अर्से तक यह नैरेटिव बनवाए रखेगा कि जम्मू कश्मीर के बाद की कूटनीति में भारत जीता!

जबकि जमीनी हकीकत के तथ्य उलटे हैं। जान लिया जाए कि ह्यूस्टन का हाउडी मोदी कार्यक्रम वैश्विक कूटनीति, भारत-पाकिस्तान के रिश्तों, जम्मू कश्मीर के जमीनी हालातों और डोनाल्ड ट्रंप के असली मिजाज से मेल खाता हुआ नहीं है। बावजूद इसके भारत और दक्षिण एशिया उप महाद्वीप के लोग प्रधानमंत्री मोदी के 21 से 27 सितंबर तक के अमेरिका के दौरे में 22 सितंबर के ह्यूस्टन शो से सर्वाधिक चमत्कृत होंगे। भारतीय समुदाय के लोगों की भीड़, अमेरिकी नेताओं-सांसदों का जमावड़ा और राष्ट्रपति ट्रंप का अपने चुनावी फायदों के लिए तालियां बजवाना बहुत कमाल का प्रभाव छोड़ेगा। संभव है कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका में भारतवंशियों के वोटों के लिए भारत-अमेरिका रिश्तों में बेहतरी की कुछ घोषणाएं भी करें। मान लें कि वे यदि दोनों देशों के बीच व्यापार में छह-आठ महीने पहले भारत को प्राथमिकता देने के दर्जे को खत्म करने के फैसले को रद्द करें तो वह बड़ी बात होगी। ट्रंप ने चीन के साथ जैसी व्यापारी पंगेबाजी की हुई है उऩ स्थितियों में भारत के साथ व्यापारिक सौहार्द दुनिया के लिए भी मैसेज लिए होगा। भारत-अमेरिकी रिश्तों की प्रगाढ़ता जाहिर होगी। हालांकि ट्रंप अपने पुराने फैसले को ही बदलने की घोषणा भर कर रहे होंगे।

मतलब ट्रंप की शोशेबाजी या उदारता भी दिखावे की होगी। यह हकीकत नोट रखें कि डोनाल्ड ट्रंप ने नौजवान भारतीयों, आईटीकर्मियों के लिए तीन सालों में वीजा लेना दूभर बनाया है तो व्यापार में मुश्किलें भी पैदा की हैं और वे पहले ऐसे दुष्ट राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने बार-बार कश्मीर के मामले में मध्यस्थ बनने की पेशकश सार्वजनिक तौर पर की है।

यह रियलिटी है। ध्यान रहे ह्यूस्टन शहर के बाद राष्ट्रपति ट्रंप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से मिलने वाले हैं। उनका इमरान खान और पाकिस्तान को भारत से ज्यादा महत्व इस हकीकत से जाहिर है क्योंकि इमरान के रोने-धोने पर ही वे बार-बार कश्मीर के मामले में हालात विस्फोटक होने या तनाव कुछ घटने की बाते करते हैं और मध्यस्थता की पेशकश करते रहे हैं। पहले ऐसी बाते पर्दे के पीछे की कूटनीति में होती थी। किसी राष्ट्रपति ने पहले कभी नहीं कहा कि भारत के प्रधानमंत्री ने उन्हें मध्यस्थता करने के लिए कहा। भारत-पाकिस्तान में पहले भी जंगी तनाव हुए हैं और दोनों देशों के बीच वाशिंगटन ने पंचायत की थी लेकिन कभी अमेरिकी राष्ट्रपति के मुंह से नहीं सुना कि दोनों इतिहास, धर्म की लड़ाई में विस्फोटक स्थिति में हैं और उन्हें चिंता है।

यह सब प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्रालय जानते हैं। बावजूद इसके यदि ह्यूस्टन के लाइव हाउडी मोदी से हिंदुओं में, भारत के लोगों में, पाकिस्तान में झांकी बनाने का मकसद जनता के बीच रियलिटी जाहिर नहीं होने देना है। लेकिन दुनिया और खास कर संयुक्त राष्ट्र में नेताओं का जमवाड़ा झांकियां नहीं देखता है। तभी पूरे सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री और विदेश मंत्रालय के तमाम आला अधिकारी वैश्विक जमात के अलग-अलग खेमों को गुपचुप इस सवाल पर भारत का पक्ष समझा रहे होंगे कि कश्मीर घाटी में हालातों की हकीकत क्या है? ये तमाम नेता पाकिस्तान के इमरान खान, उनके विदेश मंत्री और पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के अफसरों को भी सुनेंगे। तभी कूटनीति के नाते, आगे जंग न बनने देने के मामले में 22-27 सितंबर का सप्ताह बहुत भारी और अहम है।

(साई फीचर्स)