डॉक्टर प्रवीण ठाकुर को जारी हुआ एससीएन

 

 

दूसरे वीडियो से हरकत में आया अस्पताल प्रशासन, वरना थी मामले को ठण्डे बस्ते में डालने की तैयारी!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। ब्रहस्पतिवार को दिन भर सोशल मीडिया पर जिला अस्पताल में हुए नाटकीय घटनाक्रम के बाद भी 17 अक्टूबर को इंदिरा गांधी जिला अस्पताल प्रशासन के द्वारा इस मामले में स्वसंज्ञान से किसी तरह की कार्यवाही नहीं की गयी, पर जब सीसीटीवी फुटेज वाला दूसरा वीडियो प्रकाश में आया तब मजबूरन अस्पताल प्रशासन को कदम उठाने पड़े।

उक्ताशय की बात इंदिरा गांधी जिला अस्पताल के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कही। सूत्रों ने बताया कि जिला अस्पताल के सिविल सर्जन के द्वारा 18 अक्टूबर को संविदा मेडिकल ऑफिसर डॉ.प्रवीण ठाकुर को कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि उनकी नियुक्ति इस उद्देश्य से की गयी थी कि वे मानवता का परिचय देते हुए चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करायेंगे।

सूत्रों ने बताया कि इस नोटिस में कहा गया है कि नगर पालिका की राजस्व समिति के सभापति अभिषेक दुबे, स्वास्थ्य समिति के सभापति चितरंजन गप्पू तिवारी आदि के द्वारा मीडिया में प्रसारित की गयी प्रथम वीडियो क्लिप में डॉ.प्रवीण ठाकुर रात को लगभग एक बजे आकस्मिक ड्यूटी के दौरान डाक्टर कक्ष में दरवाजा बंद कर सो रहे थे। मरीज़ उन्हें जगाने का प्रयास कर रहे थे। उनके द्वारा दरवाजा खोलते ही गार्ड को डांटा गया और अपशब्द कहे गये, जबकि गार्ड के द्वारा कहा गया कि उसने मरीज़ों के परिजनों को ऐसा करने से रोका था, तब डॉ.ठाकुर एक बार फिर दरवाजा बंद कर सो गये।

सूत्रों की मानें तो इस नोटिस में कहा गया है कि वीडियो की दूसरी क्लिप में लगभग उसी समय डाक्टर ड्यूटी रूम से एक व्यक्ति निकलकर गार्ड को पीटता हुआ दिखायी दे रहा है। इस अवधि में डॉ.ठाकुर के द्वारा अधीनस्थ कर्मचारी (गार्ड) को बचाने का प्रयास नहीं किया गया और न ही इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को ही दी गयी। सीएस ने डॉ.ठाकुर से यह जानकारी चाही है कि वह व्यक्ति कौन था और वह रात के एक बजे ड्यूटी रूम में बंद दरवाजे में क्या कर रहा था!

सूत्रों ने कहा कि जिला अस्पताल में सीसीटीवी लगे हुए हैं। जिस दूसरी वीडियो क्लिप का जिक्र सिविल सर्जन के द्वारा किया जा रहा है वह संभवतः अस्पताल के सीसीटीवी की ही है। अस्पताल प्रशासन अगर चाहता तो एक बजे से पहले उसी (संभवतः कैमरा नंबर चार) की सीसीटीवी फुटेज देख ली जाती तो पता चल जाता कि जिस व्यक्ति के द्वारा गार्ड के साथ मारपीट की जा रही थी वह डॉक्टर ड्यूटी रूम में कब प्रविष्ट हुआ। इसके साथ ही साथ रात को डॉक्टर ड्यूटी रूम में और कौन – कौन गये थे।

सूत्रों ने कहा कि जाँच के नाम पर अब रस्म अदायगी करने का प्रयास किया जाये तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये। इसके पहले जब तक अस्पताल के सीसीटीवी की फुटेज वायरल नहीं हुई थी, तब तक अस्पताल प्रशासन के द्वारा इस मामले को रफा दफा करने का मन बना लिया गया था।

सूत्रों ने यह भी बताया कि डॉक्टर प्रवीण ठाकुर के द्वारा अधिकारियों को ब्रहस्पतिवार को सुबह यह बात बतायी गयी कि रात का विवाद सुरक्षा गार्ड और किसी एंबुलेंस संचालक के बीच हुआ था तो इस बात पर बिना जाँच के ही अस्पताल प्रशासन ने भरोसा कर लिया था, अगर दूसरा क्लिप सोशल मीडिया पर नहीं आता तो निश्चित तौर पर यह मामला दब चुका होता।

नहीं थी डॉ.ठाकुर की नाईट ड्यूटी : सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को यह भी बताया कि जिस रात यह वाकया हुआ उस रात दरअसल, डॉक्टर सिरोठिया की नाईट ड्यूटी थी। चूँकि डॉ.ठाकुर के किसी रिश्तेदार का पैर फ्रेक्चर था और ब्रहस्पतिवार को उनकी शल्य क्रिया होना थी, इसलिये डॉ.सिरोठिया के स्थान पर डॉ.प्रवीण ठाकुर ने नाईट ड्यूटी करने पर सहमति दे दी थी ताकि अगले दिन डॉ.सिरोठिया दिन में अवकाश पर न रहते हुए ऑपरेशन कर सकें।