भारत माता की प्रतिमा लग सकती है अस्पताल में!

 

 

जिला अस्पताल के बगीचे में प्रतिमा लगाये जाने पर चल रहा विचार!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। लगभग ढाई साल पहले उपनगरीय इलाके मरझोर से पुलिस के द्वारा जप्त की गयी भारत माता की प्रतिमा को कोतवाली से निकालने के मार्ग प्रशस्त हो सकते हैं। इस प्रतिमा को प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी जिला अस्पताल के ब्हाय रोगी विभाग के सामने बगीचे में लगाये जाने पर विचार किया जा रहा है।

जिलाधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि दो साल पहले 13 अगस्त को मरझोर की सरकारी भूमि पर स्थापित की जाने वाली भारत माता की प्रतिमा को, लोगों की शिकायत के उपरांत वहाँ से उठाकर पुलिस के द्वारा कोतवाली परिसर में रखवा दिया गया था।

सूत्रों ने बताया कि इसके बाद जिलाधिकारी धनराजू एस., गोपाल चंद्र डाड के कार्यकाल में इस प्रतिमा को कोतवाली से निकालकर किसी अन्य जगह स्थापित करवाने की पहल नहीं की गयी, किन्तु वर्तमान जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा इस प्रतिमा को कोतवाली से निकालकर जिला अस्पताल में लगाये जाने पर विचार किया जा रहा है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि इस प्रतिमा को लगाये जाने वाले लोगों की मंशा भी यही है कि प्रतिमा को किसी उपयुक्त स्थल पर लगाया जाये। अगर जिला प्रशासन के द्वारा यह प्रस्ताव प्रतिमा का निर्माण कराये जाने वालों को दिया जाता है कि प्रतिमा को जिला अस्पताल परिसर में लगाया जाये तो उनके द्वारा भी इस मामले में आसानी से अपनी सहमति दी जा सकती है।

सूत्रों ने यह भी कहा कि अगर ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर जिला अस्पताल में भारत माता की प्रतिमा को न केवल लोग देखने जायेंगे वरन इसका निर्माण कराने वालों की मंशा और उनकी मेहनत की सभी के द्वारा सराहना भी की जा सकती है। इस प्रतिमा का निर्माण विपत लाल विश्वकर्मा के द्वारा कराया गया था।

सूत्रों ने बताया कि इस प्रतिमा को अगर मरझोर में सरकारी भूमि पर लगाया जाता तो यह शहर से कुछ दूरी पर रहती, जिससे लोगों को आने जाने में परेशानी होती, पर जिला अस्पताल शहर के अंदर है और यहाँ पहुँचना लोगों के लिये आसान ही रहेगा। इसके लिये अस्पताल के बगीचे में चबूतरे का निर्माण भी कराया जायेगा।

ज्ञातव्य है कि 2017 में 13 जनवरी को मरझोर में सरकारी भूमि पर बिना अनुमति लगायी जा रही प्रतिमा को लोगों की शिकायत के उपरांत कोतवाली पुलिस के द्वारा जप्त किया गया था। इसके बाद से यह प्रतिमा कोतवाली परिसर में ही रखी हुई है।