थामस कुक की खत्म यात्रा!

 

 

(विवेक सक्सेना)

जब दो साल पहले बेटे ने आस्क मी नाम की मार्केटिग-बाजार कंपनी में नौकरी शुरू की तो मैं बहुत खुश था। आए दिन देश के बड़े-बड़े अखबारों में छप रहा था कि वह कंपनी आगे चल कर रिलायंस इंडस्ट्रीज की तरह प्रगति करेगी। उसे विदशों से करीब 1000 करोड़ रू का निवेश मिला। वह पड़ोसी दुकानदार का विकल्प पैदा कर रही थी व घर बैठे अगले दिन हल्दी से लेकर फर्नीचर तक पहुंचा देने के दावे कर रही थी। मगर एक दिन चेहरा लटाकए बेटा घर लौटा और उसने बताया कि कंपनी ने ताला जड़ दिया है और सबको बिना कोई नोटिस या हर्जाना दिए नौकरियां समाप्त कर दी है। 

तब मुझे लगा कि यह गाना एकदम सही है कि इंट हैपेंड ओनली इन इंडिया। मगर जब 168 साल पुरानी ब्रिटिश कंपनी थामस कुक द्वारा अचानक अपना काम धंधा बंद कर 6 लाख यात्रियों और 22,000 कर्मचारियों को फुटपाथ पर खड़ा कर देने की खबर पढ़ी तो मुझे एक कहावत याद आ गई। अरबी घोड़े सिर्फ अरब में ही नहीं होते हैँ। वहां भी लड्डू घोड़े होते हैं। यह खबर मेरे लिए अप्रत्याश्ति थी क्योंकि मैं इस कंपनी के बारे में काफी अच्छी धारणा रखता था।

दो विश्व युद्धों के दौरान भी किसी आर्थिक संकट में न आने वाली इस कंपनी ने 12 सितंबर को अपने दिवालिया हो जाने का ऐलान करते हुए अपनी सारी सेवाएं बंद कर दी। इस कारण इसकी सेवाओं पर विदेश जाने वाले 6 लाख यात्री दुनिया के विभिन्न देशों में फंस कर रह गए। वे लोग उसके अलग-अलग हाली डे पैकेज पर दुनिया के अलग-अलग देशों की यात्रा कर रहे थे। फंसे हुए यात्रियों में से एक यात्री ब्रिटिश नागरिक है।

थामस कुक एक बेहद प्रतिष्ठित कंपनी थी जिसकी साख पर कोई सवाल ही नहीं उठाया जा सकता था। वह तो भला हो ब्रिटिश सरकार का जिसने अपने नागरिकों के प्रति अपनी संवदेनशीलता दिखाते हुए उन्हे लाने के लिए विशेष अभियान चलाने की घोषणा की है। वहां के परिवहन मंत्री ने बताया कि सरकार इन लोगों को विशेष जहाजो से अपने देश तक मुफ्त में लेकर आएगी। वे लोग बुल्गारिया, क्यूबा, अमेरिका और टर्की में फंस गए हैं। ब्रिटेन में आपरेशन मैटरजर्न के नाम से शुरू किया गया यह निवासी अभियान वहां के इतिहास में नागरिको को लाने का सबसे बड़ा अभियान है।

इस देश ने दो विश्व युद्ध के दौरान भी इतनी ज्यादा संख्या में विदेशों से अपने नागरिक के बचाव का अभियान नहीं चलाया था। इसके लिए सरकार ने दर्जन भर विशेष विमान किराए पर लिए हैं। उन्हें एक हफ्ते के अंदर स्वदेश लाया जाएगा। कंपनी ने अपने बयान में कहा कि बढ़ते खर्च, ब्रेग्जिट व 2007 में माई ट्रेवल कंपनी के विलय के बाद वह तेजी की तरह बढ़ रहे कर्ज से निपटने का तरीका नहीं ढूंढ़ पाई। दुनिया भर में कंपनी के 22 हजार लोग बेकार हो गए है। इनमें से 9000 अकेले ब्रिटिश नागरिक है।

कभी रिलायंस इंडस्ट्रीज की तरह ब्रिटेन की विशिष्ट कंपनी मानी जाने वाली थामक कुक का अतीत बहुत रोचक है। वह भी विवादों से घिरा हुआ है। कंपनी के असली मालिकों से यह कंपनी शुरू से छिनती आई है। इस कंपनी की स्थापना 4 अगस्त 1845 कोइंगलैंड के एक बदर्स ने की थी जिसने बचपन से रोजी रोटी कमाना शुरू कर दिया था। थामस कुक नाम व्यक्ति जब महज 10 साल का था तो एक माली के सहायक के रूप में काम करता था।

बड़ा होने पर वह एक बढ़ई के साथ काम करने लगा और लकड़ी की अल्मारियां बनाकर बेचने लगा। वह काफी धार्मिक था व लोगों को धार्मिक स्थलों पर घुमाने ले जाता था। उसने 1851 में चर्च के 1.5 लाख लोगों को लंदन में आयोजित एक नुमाइश देखने के लिए साथ चलने को मनाया। फिर वह लोगों को फ्रांस, बेल्जियम आदि घूमाने ले जाने लगा। उसका दिमाग शुरू से ही तेज था। उसने इसके लिए बेल्जियम की रेलवे कंपनी से संपर्क किया और उनसे विशेष दर पर यात्रियों के टिकट देने को कहा।

वह अपने ग्रुप के लोगों के लिए यात्रा सुविधाएं जैसे रेल टिकट, होटल बुकिग, अटैची आदि उपलब्ध करवाने लगा। उसने अपने विशेष कूपन जारी किए जिन्हें खरीद कर यात्री बाहर के होटलो में बिना पहले से कमरा बुक करवाए ठहर सकते थे। क्योंकि वह अपनी कंपनी के नाम से कमरे बुक करवाता व उन्हें रियायती दरों पर खाना उपलब्ध करवाता। उसने अपने दफ्तर के ऊपर एक होटल भी खोला पर वह चला नहीं। वह उन्हें यात्रा के विशेष पैकेज देता।

उसने 1881 में मुंबई में अपना होटल खोला। तब तक वह थामस कुक एंड संस नाम की कंपनी बन चुका था। यह बात अलग है कि उसके धंधे में अपने जिस बेटे का अपना भागीदार बनाया उसी ने बाद में उसे कंपनी छोड़ने के लिए बाध्य कर दिया। उसने रेल को भी सर्कुलर टिकट जारी करने की सलाह दी ताकि एक बार टिकट खरीद कर यात्री कई दिनों तक विभिन्न जगहों को देखते हुए यात्राएं कर सके। उसने कई रेल कंपनियों की अर्थव्यवस्था मजबूत करने में उनकी मदद की।

कंपनी पर्यटन के लिए दुनिया भर में एक विश्वासपात्र नाम बन गई जोकि दुनिया भर में अपने ग्राहको को वीजा, हवाई टिकट, होटल बुकिग व टूर की सुविधाएं उपलब्ध करवाती थी। 2018 में उसकी कंपनी को 163 मिलियन पौड का लाभ हुआ था। इसके बावजूद कंपनी के खर्च बढते गए। कई कंपनियों व उसके निवेशको ने कंपनी में पैसा लगाने का वादा तो किया मगर निवेश नहीं किया।

20 अरब पौंड का धंधा करने वाली थामस कुक कंपनी दुनिया भर में 2 करोड़ यात्रियों को सालाना अपनी सेवाएं दे रही थी। ध्यान रहे कि महज दो साल पहले ही ब्रिटेन की प्रतिष्ठित मोनार्क एयर लाइंस बंद हुई थी। पर्यटन सुविधाओं का पर्याय बन चुकी इस कंपनी की अहमियत का पता इससे भी लगाया जा सकता है कि वह लंदन शेयर बाजर सेसेंक्स एफटीएसई के 100 शेयरों में शामिल रही थी। मगर कुछ वर्षों से उसके शेयरों की कीमत बहुत गिर चुकी थी।

(साई फीचर्स)