ओपन कैप में रखी धान भीगकर हो गयी बर्बाद

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। ओपन कैप में रखी धान बारिश से खराब हो रही है। जिला मुख्यालय से 07 किलो मीटर दूर देवरी व नरेला के स्टेग से मिलरों को बारिश से भीगी धान मिलिंग के लिये दी जा रही है। उठाव में देरी के कारण यहाँ रखी लाखों क्विंटल धान सड़ने का खतरा बढ़ता जा रहा है।

मार्कफेड व नान के अधिकारियों की अनदेखी के कारण करोड़ों रुपये की धान बर्बाद होने की कगार पर है। रविवार को हुई बारिश से स्टेग में रखी धान को और ज्यादा नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जानकारों के मुताबिक खराब धान व दूसरे अनाज को शराब कंपनियां सस्ते दाम पर खरीदती हैं। पिछले सालों में जिले में कई हजार क्विंटल धान खराब हो चुकी है। मिलर्स को खराब धान देकर मिलिंग का दबाव बनाया जा रहा है।

10 लाख क्विंटल धान भण्डारित : समर्थन मूल्य पर हुई धान की खरीदी में ओपन स्टेग में लगभग 10 लाख क्विंटल धान का भण्डारण हुआ था। इसमें लगभग पाँच लाख क्विंटल धान मिलर्स को दिया जा चुका है। शेष धान अभी भी ओपन कैप में रखी है जिसे 30 अक्टूबर तक मिलिंग कराना है लेकिन मिलर्सं द्वारा जमा किये जा रहे चावल को फेल करने को लेकर धान का उठाव कम हो गया। ऐसे में पूरा उठाव होना मुश्किल होता दिख रहा है। वहीं दूसरी ओर फिर से बारिश हाने से धान खराब होने के आसार और बढ़ गये हैं।

भीगे धान से बनता है लाल चावल : मिलर्स को जो खराब धान जबर्दस्ती थोपा जा रहा है वह उसकी मिलिंग करने में भी दिक्कतें हो रही हैं। धान से चावल लाल बन रहा है और टूटन भी अधिक हो रही है। उसी चावल को ही नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी फेल कर रहे हैं या फिर उसे जमा करने से इंकार कर रहे हैं। मिलर्स का कहना है कि विभाग की ही गलती के कारण उन्हें अब परेशानी में डाल दिया गया है। वहीं दूसरी और अधिकारी धान का उठाव करने के लिये दबाव बनाये हुए हैं।

बारिश से सुरक्षा करना भूले : ओपन कैप में रखी गयी धान को बारिश से बचाने के लिये कोई खास इंतजाम नहीं किये गये। जो स्टेग में तिरपाल ढांकी गयी थी वह भी घटिया स्तर की थी ऐसे में बारिश और धूप के अलावा हवा में तिरपाल फट गयी। बारिश का पानी स्टेग के अंदर घुस गया। नतीजतन धान खराब हो गयी जबकि धान भीगने पर उसे बचाने के लिये तिरपाल खोला जाना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मार्कफेड ने सुरक्षा कर्मचारियों के अलावा अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगायी है। इसके बाद भी धान खराब हो गयी।

तो शराब के लिये देंगे सड़ी धान : सड़ी धान को शराब बनाने के लिये उपयोग किया जाता है। ऐसे में धान की शराब कंपनियों को देने के लिये मानो पूरी तैयारियां कर ली गयी हैं। जो खराब धान होती है उसे शराब कंपनियों को कम कीमत में बेच दिया जाता है। यह सिलसिला जिले में लंबे समय से चल रहा है।

1750 रुपये प्रति क्विंटल के भाव खरीदी गयी धान 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेच दिया जाता है। सिवनी में वर्ष 2013-14 में खरीदी गयी धान सड़ गयी थी। आज भी धान नरेला में रखी हुई है। हालांकि इससे पहले दूसरे स्थान पर रखी धान को शराब कारोबारियों को बेच दिया गया था।