खैररांजी मामले में अभी भी खाली हाथ है पुलिस!

 

 

परिजन हुए निराश, आशंकाओं कुशंकाओं का बाज़ार लगा गर्माने!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। केवलारी थाने के खैररांजी गाँव में लापता हुई नाबालिग के मामले में अब तक केवलारी पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लगा है। इस मामले में युवती को कथित तौर पर ले जाने वाले आरोपी से पूछताछ में भी पुलिस के हाथ कोई ठोस बात नहीं लग पायी है।

केवलारी क्षेत्र में चल रहीं चर्चाओं के अनुसार लापता नाबालिग अगर गर्भवती थी तो आरोपी या किसी अन्य के द्वारा उसे कहाँ ले जाया गया! उसका गर्भपात अगर करवाया गया तो कहाँ करवाया गया! वर्तमान में युवती कहाँ है! इस तरह के प्रश्नों के साथ ही साथ आशंकाओं, कुशंकाओं की चर्चाएं तेजी से होने लगी हैं।

केवलारी पुलिस सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस पूरे मामले केवलारी पुलिस के द्वारा शिकायत प्राप्त होने के बाद भी तत्काल पतासाजी जैसी कार्यवाही न किये जाने के कारण यह मामला उलझ चुका है। बुधवार को नाबालिग के पिता का शव एक कुंए में मिलने से मामला एक बार फिर गर्मा गया था।

सूत्रों ने बताया कि आरोपी प्रदीप से पूछतात की जा रही है। आरोपी नाबालिग को लेकर नैनपुर गया था। नैनपुर में उसे एक चिकित्सक के पास भी गर्भपात के उद्देश्य से आरोपी ने दिखाया था। इसके बाद आरोपी के द्वारा नाबालिग को गर्भपात वाली दवाएं खाने को दी गयीं थीं, जिन्हें संभवतः नाबालिग के द्वारा खाने से इंकार कर दिया गया था।

सूत्रों ने यह भी बताया कि आरोपी से पूछताछ करने में पुलिस के सामने अनेक दुश्वारियां आ रही हैं। आरोपी आसानी से सारी बातें खुलकर नहीं बता पा रहा है। इसके अलावा आरोपी खुद के पास मोबाईल नहीं रखता था, जिससे यह पता चल सके कि वह इस दौरान कहाँ – कहाँ गया था! आरोपी के द्वारा अपने किसी साथी का मोबाईल लेकर परिजनों से बातें की जाती थीं।

ज्ञातव्य है कि इसके पहले 15 जुलाई को नाबालिग की माता के द्वारा केवलारी थाने में अपनी पुत्री की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाना चाहा गया था किन्तु केवलारी पुलिस के द्वारा उसकी एक न सुनी गयी। इसके लगभग डेढ़ माह बाद केवलारी पुलिस के द्वारा 26 अगस्त को उसकी फरियाद पर धारा 363 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था।

सूत्रों ने यह भी बताया कि इस मामले में केवलारी थाने में दखल रखने वाले कुछ दलालनुमा लोगों के द्वारा मामला दर्ज न हो पाने की दिशा में कोशिश भी की गयी थी। संभवतः यही कारण था कि आवेदिका को लगभग डेढ़ माह तक यहाँ से वहाँ भटकाया जाता रहा था।

सूत्रों ने यह भी कहा कि जिला मुख्यालय सहित जिले भर में अवैध रूप से गर्भपात कराये जाने की चर्चाएं होने के बाद भी न तो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के द्वारा किसी तरह की कार्यवाही की गयी न ही पुलिस के द्वारा भी अपने सूचना तंत्र का उपयोग कर यह पता करने की कोशिश की गयी कि जिले में कहाँ – कहाँ अवैध रूप से गर्भपात कराये जाने का खेल चल रहा है।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा अवैध रूप से भ्रूण परीक्षण, गर्भपात आदि न करवाये जाने के लिये चिकित्सकों को ताकीद तो किया जाता है किन्तु अमले के द्वारा सालों से मैदान में उतरकर कार्यवाही न किये जाने के कारण अनेक सवालिया निशान भी खड़े हो रहे हैं।

बताया जाता है कि शहरों और ग्रामीण अंचलों में झोला छाप चिकित्सकों सहित अनेक अन्य चिकित्सकों और पेरामेडिकल स्टॉफ के द्वारा अवैध रूप से गर्भपात कराया जाकर जमकर पैसा कमाया जा रहा है। इस मामले में संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह और जिला पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक के ध्यानाकर्षण की जनापेक्षा है।