प्रदेश में पासपोर्ट बनवाने को लेकर बढ़ रही है महिलाओं की संख्‍या

 

 

 

 

(ब्‍यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश से विदेशों में जाकर उच्च शिक्षा, नौकरी अथवा घूमने के लिए महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यह पहला मौका है कि जब इस साल हर दिन पासपोर्ट बनवाने तुलनात्मक रूप से महिलाओं की ज्यादा भीड़ उमड़ रही है।

सात महीने के दौरान पासपोर्ट बनवाने महिलाएं सबसे ज्यादा विदेश मंत्रालय पहुंचीं। पासपोर्ट कार्यालय ने हर महीने लगभग साढ़े सात हजार महिलाओं के पासपोर्ट जारी किए, जबकि पुरुषों की संख्या इससे कम रही। इस बदलाव से विदेश मंत्रालय भी भौंचक है और इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहा है।

समाज में आए इस चौंकाने वाले बदलाव की यह तस्वीर सात महीने के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर सामने आई। जनवरी से जुलाई 2019 के दौरान मप्र में एक लाख से अधिक पासपोर्ट जारी किए गए।

इनमें महिलाओं की संख्या 51 हजार 921 थी, जबकि पुरुषों की संख्या 48 हजार 261 ही रही। जुलाई के महीने में कुल 8 हजार 234 महिलाओं को पासपोर्ट जारी किए गए जबकि इस दौरान पासपोर्ट पाने वाले पुरुषों की संख्या महज 5 हजार 355 थी, इस महीने में ही करीब तीन हजार महिलाओं की संख्या ज्यादा रही। तुलनात्मक रुप से हर दिन पासपोर्ट कार्यालय में जितने आवेदन आ रहे हैं, उनमें महिला आवेदकों की संख्या ज्यादा है।

पिछले साल पीछे थीं महिलाएं

क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय मप्र ने पिछले वर्ष 2018 के दौरान कुल 2 लाख 24 हजार 53 पासपोर्ट जारी किए थे। इनमें पुरुषों की संख्या 1 लाख 37 हजार 420 थी, जबकि महिलाओं के पासपोर्ट की संख्या 86 हजार 622 रही। इनमें 11 ट्रांसजेंडर की श्रेणी के भी पासपोर्ट जारी हुए।

नियमों का हुआ सरलीकरण

विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि महिला सशक्तिकरण का यह सबसे जीवंत उदाहरण है। दरअसल इसके पीछे मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट निर्माण की प्रक्रिया में किया गया सरलीकरण भी प्रमुख कारण है। मंत्रालय द्वारा समय-समय पर चलाए गए कार्यक्रमों की भी भूमिका है। इसके अलावा शैक्षणिक परिसरों में स्टूडेंट कनेक्ट” जैसे कार्यक्रम, शासकीय एवं निजी संस्थानों में जागरूकता शिविर और प्रदेश के करीब डेढ़ दर्जन शहरों के मुख्य डाकघरों में पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों का खुलना भी सहायक रहा।

बदली समाज की सोच: रश्मि बघेल

मप्र की क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी रश्मि बघेल कहती हैं कि नागरिकता के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में पासपोर्ट की अहमियत लोगों को समझ में आने लगी है। पासपोर्ट बनवाने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है, समाज व नई पीढ़ी में उच्च शिक्षा को लेकर सोच भी बदल रहा है। अब अभिभावक भी लड़कियों को विदेशों में जाकर उच्च शिक्षा एवं नौकरी करने की अनुमति देने में संकोच नहीं करते। यही वजह है समाज में महिलाओं में जागरूकता के साथ महत्वाकांक्षा और आत्मनिर्भरता भी बढ़ रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *