फिल्म स्त्री बनने के बाद इस जगह को देखने के लिए पहुंचे 50 हजार पर्यटक

 

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। प्रदेश सरकार पर्यटन के प्रचार-प्रसार के लिए फिल्म पॉलिसी बना रही है। इस पॉलिसी का मसौदा पर्यटन विभाग तैयार कर रहा है। फिल्म पॉलिसी बनाने के लिए सरकार इसलिए उत्साहित है क्योंकि स्त्री फिल्म आने के बाद चंदेरी में 50 हजार पर्यटक आए। इस फिल्म में श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव ने काम किया है। यह एक भूत की कहनी है जो चंदेरी में शूट हुई है।

श्रद्धा कपूर बस में बैठकर जब वहां से जाती हैं तो वहां पर चंदेरी का बोर्ड लगा हुआ दिखाया जाता है। नई फिल्म पॉलिसी के जरिए सरकार प्रदेश के पर्यटन स्थलों का प्रचार करेगी। जहां पर शूटिंग होगी उसका नाम फिल्म में दिखाया जाएगा। सरकार को लगता है कि जिस तरह चंदेरी के सिर्फ एक बोर्ड को फिल्म में दिखाने से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आ सकते हैं तो फिर पर्यटकों की आवाजाही से महरुम अन्य शहरों में ऐसा क्यों नहीं हो सकता। इसके बदले में सराकर फिल्म निर्माता को कई रियायतें भी देगी। प्रदेश में फिल्म टूरिज्म प्रोत्साहन के लिये विशेष रूप से फिल्म पॉलिसी लायी जा रही है।

इस तरह की होगी फिल्म पॉलिसी :

सरकार को लगता है कि प्रदेश फिल्म शूटिंग के लिए अनुकूल है, यहां पर जंगल हैं, नेशनल पार्क हैं,नदियां,पहाड़ और प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक इमारते हैं। कई फिल्मों की यहां शूटिंग भी हो चुकी है। फिल्म पॉलिसी के तहत सरकार एक कोर्डिनेटर नियुक्त करेगी जो मुख्य सचिव के ऑफिस से संबद्ध होगा।

ये कॉर्डिनेटर फिल्म से जुड़ी आवश्यकताओं और सुविधाओं का इंतजाम करेगा। फिल्म से जुड़ी सारी अनुमतियों की जिम्मेदारी भी इस अधिकारी के हवाले होगी। पर्यटन विभाग अपने लोकेशंस पर फिल्म निर्माताओं को ले जाएगा और नेशनल पार्क,ऐतिहासिक इमारतों में शूटिंग की अनुमति भी तत्काल दिलवाई जाएगी। इसके लिए फिल्म निर्माताओं को परेशान नहीं होना पड़ेगा। करों में रियायतें भी दी जाएंगी। जल्द ही इस फिल्म पॉलिसी के मसौदे को अंतिम रुप दे दिया जाएगा।

लोग जी सकेंगे गांवों की जिंदगी :

पर्यटन विभाग के सर्वे में ये बात सामने आई है कि बड़े शहरों की भाग-दौड़ भरी जिंदगी से उबकर लोग गांवों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। विभाग ग्रामीण पर्यटन की नई योजना बनाई है। इसके लिए अलग-अलग जिलों के 22 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों को ग्रामीण पर्यटन की तरह बनाया जा रहा है।

यहां पर लोग आकर ग्रामीणों का जीवन जी सकते हैं। खपरैल वाले घरों में रहकर गांव वालों की तरह भोजन कर सकेंगे। खेत-खलिहान भी घूमने जा पाएंगे। घरों को कुछ इस तरह बनाया जाएगा जिससे शहरी लोग कुछ दिन यहां आराम से गुजार सकें और ग्रामीण जीवन का आनंद उठा सकें। इसके अलावा पुरातत्व विभाग की ऐतिहासिक इमारतों, डाक बंगलों और विलक्षण शासकीय भवनों को होटल के रूप में विकसित करने पर भी काम जारी है।