गांधी और मोदी के सपने को सेवक बनकर करें साकार

 

 

(रविन्द्र किशोर सिन्हा)

बस पांच साल पहले, दस साल की कमजोर गठबंधन सरकार के बाद भारत ने नरेंद्र मोदी को एक शानदार जनादेश दिया। 2014 में नरेंद्र मोदी को मिले भारी जनादेश को लेकर ज्यादातर सियासी पंडितों को घोर अचरज हुआ। समाज के सभी वर्गों के लिए सबका साथ, सबका विकास के उद्घोष को साकार करते हुए पिछले पांच वर्षों से लगातार काम कर रही मोदी सरकार एक बार फिर से एक विशाल जनादेश के साथ दोबारा सत्ता में आई। साफतौर पर जनता ने एक स्वर में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लागू सुशासन मॉडल को स्वीकार किया।

हमारी माताओं-बहनों को रसोई में खतरनाक धुएं से मुक्ति दिलाने के लिए गैस सिलिंडर से लेकर महिलाओं की गरिमा की रक्षा के लिए शौचालय का निर्माण करवाना हो, आयुष्मान भारत योजना के जरिए स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना हो या फिर पिछले 7 दशकों से देश को लूटने वाले भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कठोर और निर्णायक कदम उठाने हों, इस सरकार ने 2014 के बाद से हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा देखे गए रामराज्य के सपने को हकीकत में बदलने के लिए हर संभव कदम उठाए हैं जिनकी 150वीं जयंती हम इस साल 2 अक्टूबर को मना रहे हैं। सभी के लिए समान अधिकार, गरीबों का सशक्तिकरण और सभी के लिए न्याय और निष्पक्ष समाज का निर्माण ही रामराज्य का मूल आधार है।

बापू के रामराज्य के सपने को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सुशासन मॉडल अर्थात सु-राज्य के जरिए पेश किया है। यह बापू का रामराज्य और मोदी का सु-राज्य ही है जो हमें एक राष्ट्र के रूप में हमारी वास्तविक शक्ति को हासिल करने में मदद करेगा और दुनिया में हमें हमारी सही जगह दिलाने में मददगार साबित होगा। जैसा कि बापू ने कहा था कि राजनीतिक स्वतंत्रता का मतलब दूसरों की नकल करना नहीं है बल्कि हमारी अपनी परिस्थितियों के अनुकूल वैसी ही व्यवस्था को तैयार करना है। महात्मा गांधी ने इसे ही रामराज्य का नाम दिया था।

मोदी 2.0 सरकार ने पहले 100 दिनों में यही स्थापित किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा, गरीबों का कल्याण और न्याय एक-दूसरे के पूरक हैं, समानार्थी हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने भी हाल ही में अपने एक ट्वीट में कहा है कि चाहे जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370, अनुच्छेद 35ए को हटाना हो या तीन तलाक के अभिशाप से मुस्लिम महिलाओं को मुक्त करवाना हो या फिर देश के सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम लाना हो, ये सभी ऐतिहासिक फैसले प्रधानमंत्री मोदी के निर्णायक नेतृत्व का ही परिणाम हैं।

हमारे देश के प्रति हमारे प्रधानमंत्री का अनथक समर्पण और सेवाभाव करोड़ों-करोड़ देशवासियों के लिए प्रेरणादायक है। अब जबकि हमारे माननीय प्रधानमंत्री बापू के आदर्शों पर चलकर हमारे देश को न्यू इंडिया बनाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में हमारा भी फर्ज बनता है कि हम सभी आगे आएं और उनकी कोशिशों में हाथ बटाएं।

एक बेहतर लोकतंत्र तब तक बेहतरीन तरीके से काम नहीं कर सकता, जब तक कि सभी नागरिक उसकी भलाई के लिए योगदान देने में सक्रिय रूप से हिस्सा नहीं लेते। इसलिए राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि के रूप में, हम सभी को सक्रिय रूप से काम करने और प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों को पूरा करने का संकल्प लेना चाहिए। हमारे प्रधानमंत्री खुद को प्रधानसेवक कहने में गर्व महसूस करते हैं, इसलिए हमें भी उनके उत्साह और जुनून से प्रेरणा लेते हुए समाजसेवा में सक्रिय रूप से एक सेवक की तरह ही काम करना चाहिए। बापू के लिए इससे बड़ी श्रद्धांजलि और प्रधानमंत्री के लिए इससे बड़ी खुशी की कोई और बात हो ही नहीं सकती कि बापू के रामराज्य को साकार करने के लिए मोदी के सु-राज्य के सपने को बढ़-चढ़कर पूरा किया जाए।

हमें लोगों को सचेत करना होगा कि चौकीदारी समय की जरूरत है। हमें गरीबों के साथ हुए अन्याय के प्रति सचेत रहना होगा, उन लोगों को सरकार के उन सभी सुशासन स्थापित करने वाली कोशिशों से अवगत करवाना होगा जिससे कि उन्हें सभी उचित न्याय और सम्मान मिल सके। प्रधानमंत्रीजी को उनकी प्राथमिकताओं तक पहुंचने में मदद करने के लिए हम सभी को अपने तरीके से अपना-अपना योगदान देना होगा, जैसे कि स्वच्छ भारत, धरती को प्लास्टिक की घुटन से मुक्त करना, विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करके पानी का संरक्षण करना और दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करना।

हमारे देश के युवाओं की राष्ट्र के विकास के प्रति एक विशेष जिम्मेदारी है क्योंकि वे ही भारत को आगे लेकर जाएंगे। आज, भारत दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र है। यहां की 65ः आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। युवा ताकत देश का भाग्य बदल सकती है। यह पूरे देश के लिए ईंधन बन सकती है। इस देश में प्रत्येक युवा में एक काम का बीड़ा उठाने और उसका हल ढूंढने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए। राष्ट्र-निर्माण की इस प्रतिज्ञा को स्वामी विवेकानंदजी के एक उद्धरण के साथ बेहतर ढंग से समझा जा सकता हैः

स्वामीजी ने कहा था, जीवन छोटा है लेकिन आत्मा अमर और शाश्वत है और एक बात निश्चित है मृत्यु, इसलिए हमें एक महान काम करने का बीड़ा उठाना चाहिए और उसे पूरा करने के लिए अपना पूरा जीवन न्योछावर कर देना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक बार कहा था कि अगर हमारे लक्ष्य स्पष्ट नहीं हैं तो हम इसे हासिल नहीं कर पाएंगे। यदि आप इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि प्लैटफॉर्म पर पहुंचने के बाद आप किस ट्रेन में सवार होना चाहते हैं तो आप न तो अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं और न ही अपनी यात्रा को लेकर कोई फैसला कर सकते हैं।

इसलिए मेरा यही मानना है कि राष्ट्र के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते बापू के रामराज्य के सपने को हासिल करने के लिए हम सभी को प्रधानमंत्री मोदी के सु-राज्य के सपने को साकार करने में अपना योगदान देना चाहिए। मैं अपने प्रधानमंत्री के प्रति विनम्र सम्मान प्रकट करते हुए संकल्प लेने जा रहा हूं- मैं भी सेवक, मैं भी मोदी। (लेखक राज्यसभा सांसद हैं)

(साई फीचर्स)