पेंशनर्स ढाई साल से तरस रहे दवाओं को!

 

 

पेंशनर्स की सुध लेने को कोई तैयार नहीं, अनेक तोड़ चुके हैं दम!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। साठ साल तक शासन की सेवा कर, सेवानिवृत्त होने वाले सरकारी कर्मचारियों को निःशुल्क मिलने वाली दवाएं नहीं मिलने के कारण पेंशनर्स बुरी तरह आहत नज़र आ रहे हैं। लगभग ढाई साल से अधिक समय से पेंशनर्स दवाओं को भटक रहे हैं, पर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा इस संबंध में किसी तरह का कदम नहीं उठाया जा रहा है।

पेंशनर्स के अनुसार साठ साल की आयु को पाने के बाद शरीर में अनेक तरह की व्याधियां घर कर जाती हैं। वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में आने के उपरांत देखरेख और दवाओं की आवश्यकता सबसे ज्यादा पड़ती है। उन्हें सबसे अधिक निराशा तब होती है जब वे अस्पताल जाते हैं और उन्हें दवाएं ही नहीं मिल पाती हैं।

पेंशनर्स की मानें तो चिकित्सकों के द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को यह कहकर संतुष्ट कर दिया जाता है कि अस्पताल में लगभग साढ़े चार सौ तरह की दवाएं जरूरी दवाओं की सूची (एसंसियल ड्रग्स लिस्ट) में शामिल हैं और पेंशनर्स को इन्ही दवाओं को प्रदाय किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती नज़र आती है।

शिक्षा विभाग से सेवा निवृत्त भोला सिंह ठाकुर ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि उनकी पत्नि सोरायसिस बीमारी से पीड़ित हैं, पर उन्हें इस मर्ज की दवा अस्पताल से नहीं मिल पाती है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन अगर चाहे तो, जरूरी दवा की सूची में शामिल दवाओं और अस्पताल में उलब्ध दवाओं का मिलान करा लिया जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है।

उनका कहना था कि दरअसल, चिकित्सकों को दवा प्रतिनिधियों के द्वारा दवाओं के नमूने (सैंपल) दे दिये जाते हैं, जिसके चलते उन्हें इस बात का आभास नहीं हो पाता है कि पेंशनर किस तरह दवाओं के बिना गुजारा करता होगा! उन्होंने यह भी कहा कि सेवा निवृत्ति के उपरांत प्राईवेट प्रेक्टिस के दौरान भी उन्हें दवा प्रतिनिधियों के द्वारा दवाएं बदस्तूर दी जाती हैं।

पेंशनर्स के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार जब डॉ.पुष्पा तेकाम सिविल सर्जन के बतौर पदस्थ थीं, उस समय से पेंशनर्स को दवाएं मिलना बंद हो चुकी हैं। अस्पताल प्रशासन के द्वारा इस मामले में बजट आवंटन नहीं मिलने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया जाता है।

पेंशनर्स की मानें तो दो सालों में क्या पेंशनर्स को दी जाने वाली दवाओं की मद में एक रूपये का आवंटन भी अब तक प्राप्त नहीं हो पाया है। पेंशनर्स के बीच यह चर्चा भी चल रही है कि पेंशनर्स एसोसिएशन के द्वारा भी समय – समय पर ज्ञापन देकर ही रस्म अदायगी कर ली जाती है।

पेंशनर्स का कहना है कि जिलाधिकारी प्रवीण सिंह की प्राथमिकता में इस समय जिला चिकित्सालय है, इस लिहाज़ से पेंशनर्स ने उनसे अपेक्षा व्यक्त की है कि वे ही पेंशनर्स को होने वाली परेशानियों को अनुभव करते हुए स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में पाबंद करें कि पेंशनर्स को पर्याप्त मात्रा में दवाएं मिल सकें।