दिल के रोग हंस कर टालने से मौत नहीं टलती

 

 

(प्रदीप सरदाना)

दुनिया भर में दिल की बीमारियों और उनके खतरों में बढ़ोतरी देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने सभी को जागरूक करने के उद्देश्य से साल 2000 से विश्व हृदय दिवस मनाने की शुरुआत की। तब से हर साल सितंबर महीने की 29 तारीख को वर्ल्ड हार्ट फाउंडेशन विश्व भर में इसका आयोजन कर रहा है। चिंता की बात यह है कि विश्व के कई अन्य देशों में तो हृदय रोगों को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन भारत में कुछ ही लोगों ने दिल के खतरों को समझा है। अधिकतर भारतीय इन 20 बरसों में दिल के स्वास्थ्य को लेकर सचेत नहीं हुए हैं।

इस बात का प्रमाण यह है कि देश में दिल के रोगियों की संख्या कम होने की जगह बढ़ रही है। उदाहरण के लिए अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियॉलजी का अध्ययन बताता है कि विश्व हृदय दिवस का आयोजन शुरू होने के बाद 15 वर्षों में अमेरिका में दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों में 41 प्रतिशत की कमी आई जबकि भारत में हृदय रोगों के कारण होने वाली मृत्यु दर 34 प्रतिशत बढ़ गई है। देश में इस समय देश में करीब 7 करोड़ व्यक्ति दिल की बीमारियों से ग्रस्त हैं। ये बीमारियां बच्चों तक में तेजी से पनप रही हैं। दो साल पहले के आंकड़े के मुताबिक दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में होने वाले दिल के कुल ऑपरेशन में से लगभग 40 प्रतिशत 13 साल से कम उम्र वाले बच्चों के थे।

विश्व के कुल हृदय रोगियों में 60 प्रतिशत सिर्फ भारत में होते हैं। इसी कारण भारत को हृदय रोगियों की राजधानी भी कहा जाता है। यूं तो आज भी पूरे विश्व में रोगों के कारण हुई मौतों में सर्वाधिक मौतें दिल की बीमारियों के कारण ही हो रही हैं। इसलिए दिल के रोगों को दुनिया का नंबर वन किलर कहा जाता है। लेकिन विश्व में जितने लोग दिल के रोगों के कारण मौत का ग्रास बनते हैं, उनमें 50 फीसदी भारत के होते हैं। एक खास बात यह है कि दिल की बीमारी अचानक नहीं होती। यह किसी भी व्यक्ति की दस-बीस साल की अव्यवस्थित जीवन शैली, गलत खान पान और धूम्रपान आदि का नतीजा होती है। यह रोग धीरे-धीरे पनपता जाता है। इसलिए यदि लोग शुरू से ही अपने दिल का ख्याल रखें तो इस बीमारी और ऐसे खतरों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

कम उम्र में दिल के रोग होने की वजह अमूमन जन्म से ही आ गई कोई गड़बड़ी होती है। इनमें भी ज्यादातर बच्चों के दिल में छेद के मामले ही होते हैं। लेकिन यदि 13 साल के आसपास की उम्र में दिल की अन्य बीमारी होती है तो विशेषज्ञों के मुताबिक वह बच्चों के गलत खानपान के कारण हो सकता है। आजकल माता-पिता खुद तो जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक्स का धड़ल्ले से सेवन करते ही हैं, बच्चों को भी दिल और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों की आदत सी डाल देते हैं। इसलिए जरूरी है कि दिल के दौरे का इंतजार करने के बजाय पहले अपनी खानपान की आदतों में परिवर्तन करें और बच्चों को भी अच्छे खानपान और नियमित योगाभ्यास का आदी बनाएं।

एम्स (दिल्ली) के हृदय विभाग में प्रमुख रहे और वर्तमान में जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल से जुड़े डॉ. बलराम एरेण बताते हैं कि दिल के रोगों के मुख्य कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह, और कोलेस्ट्रॉल का अधिक होना हैं। लेकिन देखा जाए तो इन सबके पीछे धूम्रपान, गलत खान पान और शारीरिक श्रम के अभाव की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डॉ. एरेण बताते हैं कि आज ग्रामीण पृष्ठभूमि में तो हालात यह देखे जा रहे हैं कि करीब 80 प्रतिशत पुरुष बचपन से ही धूम्रपान के शिकार हो जाते हैं। इसलिए सौ बातों की एक बात यह है कि यदि लोग अपना खानपान ठीक रखें, तंबाकू के हर रूप से बचें और उन लोगों के आसपास भी न रहें जो खुद धूम्रपान करते हुए सामने वाले के मुंह पर धुआं छोड़ते रहते हैं। साथ ही नियमित योग या एक घंटे की नियमित सैर के जरिए भी दिल के रोगों को आसानी से दूर रखा जा सकता है।

(साई फीचर्स)