नियमों को बलाए ताक रख चलती यात्री बस!

 

 

(शरद खरे)

सिवनी जिले में यात्री बसों पर लगता है किसी का कोई अंकुश नहीं रह गया है। यात्री बसों की हालत देखकर लगता है कि प्रदेश सरकार के नियम कायदों का पालन करवाने में परिवहन विभाग पूरी तरह अक्षम ही साबित हो रहा है। बेलगाम दौड़ती यात्री बस और मैक्सी कैब वाहनों में सफर करना यात्रियों की मजबूरी इसलिये भी है क्योंकि इसकी कोई वैकल्पिक व्यवस्था जो नहीं है।

अधिकांश यात्री बसों में न तो फर्स्ट एड बॉक्स है और न ही किराया सूची ही चस्पा है। यात्री बसों के पास वैध परमिट, फिटनेस भी है या नहीं, यह भी कोई नहीं जानता। एक समय था जब सड़क परिवहन निगम की यात्री बस चला करती थीं, तब यात्री बस के सामने वाले कंडॅक्टर साईड वाले शीशे पर यात्री बसों में फिटनेस और परमिट की तिथि अंकित हुआ करती थी।

सड़क परिवहन निगम का अस्तित्व जब से समाप्त हुआ है, उसके बाद से मानो निजि बस संचालकों की पौ बारह हो चुकी है। निजि तौर पर संचालित होने वाली छोटी यात्री बस में सीटों को भी आरामदायक नहीं माना जा सकता है। एक सीट पर दो यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है पर दो यात्री बमुश्किल ही इसमें बैठ पाते हैं।

यात्री बसों में आरंभ से गंतव्य तक मार्ग में पड़ने वाले शहरों (जहाँ बस को रूककर सवारी लेना और उतारना है) की किराया सूची और समय सारिणी भी यात्री बस में चस्पा न होने से आये दिन चालक परिचालकों से यात्रियों की बहस होती रहती है। यात्री बसों को भरने वाले एजेंट भी गुण्डागर्दी पर उतारू दिखते हैं।

सुपर फास्ट, एक्सप्रेस और साधारण बस में आज अंतर समाप्त हो गया है। अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में दु्रत गति से चलने वाली यात्री बसों को भी स्थान-स्थान पर रोका जाता है, उसके बाद टाईमिंग मिलाने के चक्कर में इन्हें अंधी रफ्तार से भगाया जाता है जिससे दुर्घटना की आशंका सदा ही बनी रहती है।

यात्री बसों में महिलाओं और विद्यार्थियों विशेषकर बालिकाओं के लिये किसी तरह की पृथक व्यवस्था नहीं है। आज विलासिता के युग में सांसद विधायक मानो यात्री बस में सफर करना भूल चुके हैं। एक समय था जब सड़क परिवहन निगम की यात्री बस में एक से तीन नंबर की सीट को विधायक सीट माना जाता था। उस दौर में सरकारी यात्री बसों के सांसद, विधायक चलते थे तो वे यात्रियों की समस्याओं से दो चार हुआ करते थे। यही कारण था कि यात्रियों की दुश्वारियों को समझकर उनके द्वारा इसे दूर करने की दिशा में प्रयास भी किये जाते थे।

सिवनी से होकर गुजरने वाले निजि यात्री वाहनों के द्वारा अब इंटरनेट के जरिये बुकिंग आरंभ करवा दी गयी है। इंटरनेट पर त्यौहारों के पहले टिकिट की कीमतें आसमान छूती प्रतीत होती हैं। इसके बाद भी अब तक इस मामले में परिवहन विभाग के द्वारा एक भी कार्यवाही न किया जाना आश्चर्य जनक ही माना जायेगा।

कुल मिलाकर परिवहन विभाग की अकर्मण्यता के चलते आज यात्री बस मानो यात्रियों के लिये आफत और संचालकों के लिये लाभ का धंधा बनकर रह गयी हैं। जिला प्रशासन से अपेक्षा की जा सकती है कि इस दिशा में उचित कार्यवाही कर यात्रियों को राहत अवश्य दिलवाये।