गुजरात के इस गांव में ‘सूंघ-सूंघकर’ ढूंढे जा रहे दूल्हे

 

 

 

 

(ब्‍यूरो कार्यालय)

गांधीनगर (साई)। शादी से पहले लड़की के परिवार की ओर से 25 लोगों का एक ग्रुप दूल्हे और उसके परिवार के लोगों की सांसें सूंघता है। अगर उनमें से किसी ने भी शराब पी होती है तो शादी की रस्में वहीं रोक दी जाती हैं और लड़के के परिजनों से मुआवजा वसूला जाता है। शराब के सेवन पर रोक लगाने के लिए गुजरात में गांधीनगर के पियाज गांव के लोगों ने यह अनोखा तरीका निकाला है।

जानकारी के मुताबिक, जिले के कलोल तालुका के पियाज गांव में किसी भी लड़की की शादी तय होने से पहले उसके परिवार की ओर 25 लोगों का एक ग्रुप दूल्हे, उसके पिता और परिवार के लोगों की सांसों का परीक्षण करता है। इसके अलावा यही प्रक्रिया शादी वाले दिन दूल्हे के परिवार तथा बरातियों के साथ भी दोहराई जाती है। अगर परिवार या बरातियों में से कोई भी मानव सांस परीक्षण में फेल हो जाता है तो शादी वहीं रोक दी जाती है।

शादी टूटने पर देना होगा एक लाख जुर्माना

इतना ही नहीं, शादी टूटने के बाद लड़के के परिवार के लोगों को लड़की के परिवार को एक लाख रुपये का मुआवजा देना पड़ता है। गांव में यह परंपरा चार साल पहले शुरू की गई थी। इसकी शुरुआत से पहले गांव के 20 साल से कम उम्र के 15 युवकों की शराब पीने के चलते मौत हो गई थी। इस नियम की शुरुआत करने वाले सरपंच रमेशजी ठाकोर बताते हैं कि उन्होंने कई मामलों में देखा है कि पति के शराबी होने के चलते महिलाओं की जिंदगी बरबाद हो जाती है।

ठाकोर ने कहा कि यह देखते हुए भी हमने शादी से पहले दूल्हे और उसके परिवार की अच्छे तरीके से पड़ताल कराने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि इस नियम की मदद से उन्होंने गांव में शराब की वजह से आने वाले खतरे को काफी हद तक कम कर दिया है। उन्होंने बताया कि गांव में कई ऐसे किशोर थे, जिनकी युवावस्था आने से पहले ही शराब पीने की वजह से मौत हो गई थी।

पुलिसवालों से नहीं मांगी मदद

मामले में पुलिस के हस्तक्षेप को लेकर किए गए सवाल के जवाब में ठाकोर ने बताया कि हमने कई बार पुलिस से मदद मांगी लेकिन जब भी पुलिसकर्मी छापा मारते उससे पहले ही शराब के ठेकेदार दुकान बंद कर फरार हो जाते। उन्होंने शराब माफिया और पुलिस के बीच साठगांठ की आशंका जताई।