आपका दिमाग नौकर तो अच्छा है, पर मालिक बहुत जालिम

 

 

(सुंदर चंद ठाकुर)

किसी छात्र या छात्रा के इम्तिहान में फेल होने के डर से आत्महत्या करने की खबर मुझे बहुत गहरी पीड़ा पहुंचाती है। इसकी एक निजी वजह यह है कि मैं अपने कॉलेज के दिनों में केंद्रीय विद्यालय में दसवीं में पढ़ रही एक लड़की को ट्युइशन पढ़ाता था। उसने इस डर से कि वह एक विषय में फेल होने वाली है, आत्महत्या कर ली। परंतु जब रिजल्ट आया, तो वह किसी भी विषय में फेल नहीं थी। सवाल यह है कि अगर वह किसी विषय में फेल हो भी जाती, तो भी आत्महत्या क्या जायज था?

परीक्षा में फेल होना जीवन में असफल होना नहीं है। ऐसे लाखों लोग हैं, जो कई-कई बार स्कूल की परीक्षाओं में फेल हुए पर जीवन की परीक्षा में विशेष योग्यता लाए। देश का कोई भी राज्य ले लो, परीक्षाओं में फेल होने के कारण हर साल हजारों बच्चे आत्महत्याएं कर रहे हैं। अब तो पांचवीं-छठी के बच्चे भी आत्महत्याएं करने लगे हैं। बच्चे अगर स्कूल की परीक्षाओं में फेल होने के कारण आत्महत्याएं कर रहे हैं, तो वयस्क जीवन की परीक्षा में फेल होकर आत्महत्याएं कर रहे हैं और इनकी संख्या बच्चों से कई गुना अधिक है। आत्महत्याओं की ये खबरें मुझे इसलिए पीड़ा पहुंचाती हैं, क्योंकि मैं जानता हूं कि दिमाग के थोड़े से प्रशिक्षण से ही इन्हें टाला जा सकता था।

विद्यार्थियों को हमारी शिक्षा प्रणाली परीक्षाओं में बैठने को विवश करती है, पर परीक्षाओं में असफलता का सामना करना नहीं सिखाती। यह काम दिमाग को प्रशिक्षित किए बिना नहीं किया जा सकता। परंतु दिमाग की कोई बात ही नहीं करता। जबकि हमारे देश में लगभग हर गुरु ने और यहां तक कि गीता के उपदेशक श्रीकृष्ण ने भी दिमाग के महत्व पर बार-बार, अलग-अलग तरीकों से बातें की हैं। योगसूत्र के रचयिता पतंजलि ने दिमाग को साधने के लिए ही अपने आठ अंगों में ध्यान को भी शामिल किया। गीता में छटे अध्याय का पांचवां श्लोक है – उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत, आत्मैव ह्यत्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः। इसमें यह आह्वान किया जा रहा है कि स्वयं को अपने दिमाग की शक्ति से ऊपर उठाओ, नीचे मत गिराओ। दिमाग ही हमें उठाने वाला परम मित्र और गिराने वाला परम शत्रु हो सकता है। जिस दिमाग का हमारे जीवन में इतना महत्व बताया गया है कि वह हमें उठा भी सकता है और गिरा भी सकता है, उसे प्रशिक्षित करने के लिए क्या हम रोज दस-बीस मिनट नहीं निकाल सकते। और ऐसा भी नहीं कि हमारे पास प्रशिक्षण की विधियां नहीं हैं। वे तो बड़ी संख्या में हैं। ध्यान करने की ही सैकड़ों विधियां हैं। बच्चों को अगर दस मिनट का ध्यान रोज करवाएं और पांच मिनट का त्राटक (शरीर को जरा भी हिलाए बिना मोमबत्ती की लौ या किसी अन्य चित्र को अपलक कुछ देर तक देखना), तो इतने भर से ही वे दिमाग की गुलामी से बाहर निकल आएंगे। उनका उस पर मालिकाना हक बनने लगेगा। पर जब माता-पिता और अध्यापक के रूप में हमने खुद ही कभी ध्यान नहीं किया, उसके दिमाग पर पड़ने वाले प्रभाव को जाना नहीं, तो हम अपने बच्चों को क्या सिखाएंगे।

एक सामान्य दिमाग और प्रशिक्षित दिमाग में फर्क यह है कि जहां सामान्य दिमाग उसमें आने वाले विचारों से तुरंत तादात्म्य कर लेता है और वह विचार बहुत जल्दी ही इमोशन में बदलकर व्यक्ति को अपने वशीभूत कर लेता है, वहीं एक प्रशिक्षित दिमाग हमेशा अपने मालिक को विचार से दूरी बनाकर रखने की सहूलियत देता है। जब वह देखता है कि विचार नकारात्मक है, तो वह उस पर ध्यान नहीं देता और विचार अपनी आदतानुसार कुछ देर में स्वयं उड़ते हुए बादलों की तरह चला जाता है। हमें यह बात समझनी चाहिए कि जीवन में हमारे हर कार्य की शुरुआत विचार से होती है। पहले दिमाग में विचार आता है और उसके बाद हम उस पर अमल करते हैं। सामान्यतः एक दिन में हमारे दिमाग में 60 हजार विचार आते हैं। कोई हैरानी नहीं कि कई तरह के दबावों और तनावों के बीच गुजरने वाला हमारा जीवन ऐसा हो चुका है कि हमारे दिमाग में आने वाले ज्यादातर विचार नकारात्मक ही होते हैं।

जब हम इन नकारात्मक विचारों से अपनी पहचान को जोड़ लेते हैं, इनसे सीधा संबंध बना लेते हैं, तो ये हमें प्रतिरोध करने का भी अवसर दिए बिना जकड़ लेते हैं। यही वजह है कि आजकल हमें शहरों के बच्चों में डिप्रेशन के इतने मामले मिलते हैं। लगभग हर तीसरा बच्चा ऐसी बीमारी से ग्रस्त है। इस बात को भलीभांति समझ लें कि अगर दिमाग को हम प्रशिक्षित नहीं करेंगे, तो वह हमारा मालिक बन जाएगा और तब हमें उसके मूड के हिसाब से काम करने होंगे। तब वह हमें छोटी-सी बात पर भी आत्महत्या करने को विवश कर सकता है। लेकिन अगर हम उसे प्रशिक्षित कर लें, तो उससे नौकर की तरह काम लें सकेंगे। ऐसा होने पर हम कुछ ही समय में अपना जीवन पूरी तरह बदल सकते हैं। हम सफलता के नए प्रतिमान खड़े कर सकते हैं। क्योंकि दिमाग का मालिक बनने के बाद हम हाथ में आने वाले हर काम को उसे किए जाने के सबसे बेहतरीन ढंग से करने लगेंगे। नकारात्मक विचारों को तो हम दूर से ही नमस्कार कर विदा कर देंगे।

(साई फीचर्स)