पटाखे खरीदने वालों के फूटे सिर!

 

इस स्तंभ के माध्यम से मैं उस प्रशासनिक व्यवस्था की शिकायत करना चाहता हूँ जिसके तहत मनमाने निर्णय लिये जाकर शहर की जनता को परेशानियों के हवाले कर दिया जाता है।

प्रशासन के द्वारा पहले तो पटाखा दुकानें लगाने का स्थान चिन्हित करने में ही काफी विलंब कर दिया गया जिसके कारण सिवनी के पटाखा व्यवसायी अपेक्षित मुनाफा नहीं कमा सके। इसके पीछे कारण यही है कि लोगों को ऐन दीवाली के दिन या उसके आसपास, पटाखे अपेक्षाकृत महंगे मिलने का अनुमान था और इसीलिये वे दीपावली के पहले पटाखे खरीदकर रखना चाहते थे लेकिन जब सिवनी में दुकानें ही नहीं लगायी गयीं तो ऐसे लोग छिंदवाड़ा जाकर पटाखे ले आये।

इसके बाद जैसे-तैसे प्रशासन ने पटाखे की दुकानों के लिये स्थान चिन्हित किया तो वह भी जल्दबाजी में लिया गया निर्णय ही साबित हुआ। इन दुकानों को लगाये जाने के लिये मठ मंदिर के समीप उस स्थान का चयन किया गया था जहाँ पहले खेती की जाती थी। प्रशासन में बैठे अनुभवहीन कर्त्ता धर्ताओं ने मौसम के रूख का जरा भी ध्यान नहीं रखा। प्रशासन में बैठे जिम्मेदार लोगों ने इस बात का जरा भी ध्यान नहीं रखा कि सिवनी में बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद भी बारिश का दौर थमा नहीं है।

यदि इस बात का ध्यान रखा होता तो निश्चित रूप से प्रशासनिक मुखियाओं के द्वारा मौसम विभाग से संपर्क स्थापित कर, आने वाले दिनों के मौसम का हाल जान लिया गया होता तो निश्चित था कि बारिश की संभावनाओं को देखते हुए पटाखा दुकानों के लिये ऐसे स्थान का चयन कतई नहीं किया जाता जहाँ पहले खेती हुआ करती थी।

बहरहाल, उस खेत का चयन पटाखा दुकानों के लिये कर लिया गया जिसके कारण बारिश ने वहाँ कीचड़ मचा दिया। पटाखा खरीदने जाने वाले इसी कीचड़ से होकर दुकानों तक पहुँचने के लिये बाध्य कर दिये गये नतीजतन लोगों के वाहन स्लिप हुए जिससे गिरकर लोग घायल हुए और कई लोगों के सिर भी इस दौरान फूटे। वाहन ही नहीं पैदल चलने वाले लोग भी इस कीचड़ में स्लिप हो रहे थे। लोगों के नये कपड़े कीचड़ से सने होने के कारण दीपावली और होली का त्यौहार एक ही समय छायांकित हो रहा था। अपेक्षा है कि प्रशासन के द्वारा आम जनता ृके हित में ही आने वाले समय में निर्णय लिये जायेंगे ताकि नागरिकों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।

चेतन देशपाण्डे