वन मेन आर्मी थे मुल्लू भईया

 

 

(अखिलेश दुबे)

स्व.मूलचंद दुबे अपने आप में एक ऐसे व्यक्ति थे, जो कि हर जाति धर्म सम्प्रदाय में समान रूप से लोकप्रिय थे। उन्होंने अपनी प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा सिवनी के साथ-साथ कई शहरों से पूरी की, क्योंकि वे शिक्षा प्राप्त करने के लिऐ अपने फूफाजी के साथ रहते थे, जो म.प्र. के पुलिस विभाग में डीएसपी के पद पर कार्यरत थे।

उन्होंने उच्च शिक्षा जबलपुर के ख्यातिलब्ध राबर्ट्सन कॉलेज से प्राप्त की और यही वह समय था, जब उनकी राजनीति के प्रति प्रेम व समाजसेवा का भाव सामने आया। वर्ष 1969 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता स्वीकार की और अपने राजनैतिक कौशल के चलते 1974 में राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष के पद पर वे निर्वाचित भी हुए।

यह वह वर्ष था, जब उनकी युवा कांग्रेस की टीम से 10 व्यक्तियों को पार्षद पद का प्रत्याशी बनाया गया और 08 लोग स्वयं उन्हें मिलाकर विजयी भी रहे। वे उन विशिष्ट व्यक्तियों में से थे, जो पदों को सुशोभित किया करते थे। हर बार अपने कार्य में इतनी कुशलता रखते थे कि हर अगले आने वाले व्यक्ति के लिये वे एक मील का पत्थर साबित होते थे। किसी तरह कारवां बढ़ता गया और वे जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष वर्ष 1980-90 म.प्र. थोक उपभोक्ता भंडार के प्रदेश संचालक मंडल के सदस्य, महात्मागांधी शिक्षण प्रशिक्षण शोध संस्थान के प्रदेश समिति के संचालक मंडल सदस्य, जिला उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष रहे।

शासकीय कार्यों और शासकीय कर्मचारियों में स्व.मूलचंद दुबे की पकड़ से सभी लोग वाकिफ थे। चपरासी से लेकर प्रमुख अधिकारी तक उनका सम्मान करते थे, जो कि जनसेवा के लिये अतिआवश्यक होता है। जनसेवा के लिए इसी के चलते वर्ष 1993 में नगरपालिका कर्मचारी संघ के लगभग दो हजार कर्मचारियों का कांग्रेस के बैनर तले समस्याओं का निराकरण भी स्व.श्री दुबे ने किया।

विद्युत कर्मचारी संगठन, सिवनी संभाग के संरक्षक कृषि उपज मंडी सिवनी कर्मचारी के संरक्षक, जिला द्विसूत्रीय कार्यक्रम के सक्रिय सदस्य, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के वे सदस्य रहे। जमीनी स्तर पर उन्होंने कार्य करने की मिसालें पेश करते हुए आदिवासी विकास खंड कुरई में एक शिविर का आयोजन कर लगभग तीन कि.मी. सड़क का निर्माण भी किया, जिसमें उनके साथ हजारों युवा कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे।

वर्षों कांग्रेस की सेवा करने के बाद भी उचित स्थान प्राप्त न होने के चलते स्व.मूलचंद दुबे ने विद्रोह भी किया, क्योंकि वे मानते थे कि अगर उनके साथ यदि न्याय न हो तो अन्याय सहना भी जुल्म है। स्व.श्री दुबे ने दो बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सिवनी विधानसभा से चुनाव लड़ा और उसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस और उनके मध्य दूरियां बढ़ती ही चली गई। उनके आघात से कांग्रेस विजयी न हो सकी। खैर स्व.श्री दुबे की नागरिक मोर्चा में सक्रियता बढ़ी और उन्होंने एक ऐसा विकल्प निकाला, जो कि जनता के लिए एकदम सटीक था।

वर्ष 1999-2000 में प्रदेश में सीधे तौर पर नगर पालिका परिषद चुनाव संपन्न होने थे, स्व.मूलचंद दुबे ने नागरिक मोर्चा की ओर से अपना नामांकन पत्र भर दिया। उनको चुनाव चिन्ह के रूप में पीपल का पत्ता आवंटित हुआ और उसके बाद जो हुआ वह इतिहास में अंकित ही है। सिवनी नगर की जनता ने आपको अभूतपूर्व समर्थन प्रदान करते हुए स्व.मूलचंद दुबे को सिवनी नपा का अध्यक्ष चुना।

स्व.मूलचंद दुबे ने अपने कार्यकाल के दौरान सभी वार्डों का निष्पक्ष भाव से विकास किया और यही कारण था कि वे हर दिल अजीत बनते चले गए। चहुंओर उनके अच्छे कार्यों और सहृदय होने की चचार्यें होने लगी, पर शायद नियती को तो जैसे कुछ और ही मंजूर था। नवंबर माह की चार तारीख को अकस्मात ही उन्हें हृदयघात हुआ और वे हम सभी को रोता बिलखता छोड़कर चले गये। उन्होंने मात्र दो वर्षों के अल्प समय में ही नई ऊंचाईयों को छू लिया था।

सारी उम्र अविवाहित रहकर समाज के प्रति दिये गये इस योगदान के लिए उनको सदैव याद रखा जायेगा। मेरी खुशनसीबी है कि मुझे उनके जैसे व्यक्तिव को इतने करीब से जानने का मौका मिला। उनकी बारात तो नहीं निकली थी, पर उनकी अंतिम यात्रा का वह मंजर जीवन के अंतिम क्षण तक कतई नहीं भुलाया जा सकता, क्योंकि शहर के प्रत्येक वर्ग-समाज का हर छोटा-बड़ा उस दिन उनको श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से हाथों में फूल और आंखों में आंसू लिये कतारबद्ध खड़ा हुआ था, आपको श्रृद्धा सुमन!

(साई फीचर्स)