देवउठनी पर विवाह के मुहूर्त नहीं!

 

 

करना होगा 19 नवंबर तक इंतज़ार

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। चार माह से पाताल लोक में शयन कर रहे भगवान विष्णु आठ नवंबर को देवउठनी ग्यारस के दिन जागेंगे। इस के साथ ही शादियां सहित सभी माँगलिक कार्यों का सिलसिला आरंभ हो जायेगा। घर-घर में देव जागने की खुशियां मनायी जायेंगी। देवउठनी ग्यारस के दिन सुबह से ही श्रद्धालु उपवास रखेंगे। वहीं शाम को सभी देवों की पूजा – अर्चना होगी।

देवलोक से पृथ्वी लोक पर पर देवों के आगमन की खुशी में घर-घर और देवालयों में रंगारंग आतिशबाजी की जायेगी। ज्योतिषियों की मानें तो इस साल देवउठनी ग्यारस पर शादियों के लिये कोई मुहूर्त नहीं है। विवाह के लिये दस दिन का इंतज़ार करना पड़ेगा। 19 नवंबर को विवाह के लिये पहला शुभ मुहूर्त है।

शादियों के लिये इस वर्ष 14 दिन ही शुभ मुहूर्त : ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष के अंतिम तक 14 दिन ही शादियों के लिये मुहूर्त हैं। इसमें सबसे ज्यादा मुहूर्त 19 से 30 नवंबर तक नौ दिन हैं। इस वर्ष शादियां 19 नवंबर से आरंभ होंगी। नवंबर और दिसंबर को मिलाकर शादियों के लिये केवल 14 मुहूर्त ही हैं।

शादियों में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। विवाह यदि शुभ योग में हो तो उसके परिणाम भी बेहतर और समृद्धि दायक होते हैं। नवंबर में 19, 20, 21, 22, 23, 24, 26, 28, 30 और दिसंबर में 05, 06, 07, 11, 12 आदि तिथियां विवाह के लिये शुभ हैं।

मराही माता स्थित कपीश्वर हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी उपेंद्र महाराज के अनुसार हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार देवशयनी के बाद माँगलिक कार्य बंद हो जाते हैं। हालांकि धार्मिक पूजा – अनुष्ठान चलते रहते हैं। देवउठनी ग्यारस पर भगवान विष्णु के जागने पर तुलसी – शालीग्राम विवाह होने के बाद मंगल कार्य आरंभ होते हैं।

इधर, ज्योतिषाचार्यों के बीच भी देव उठनी ग्यारस को लेकर विभिन्न मत सामने आ रहे हैं। कुछ का मानना है कि इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है तो कुछ के अनुसार इस बार ग्यारस के दिन विवाह नहीं होंगे। कारण, वर्तमान में सूर्य तुला राशि में है। तुला राशि में सूर्य के होने से विवाह नहीं होते। 17 नवंबर को सूर्य जैसे ही तुला से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। शादी समारोह आरंभ हो जायेंगे। इस वजह से विवाह आदि माँगलिक कार्यों के लिये लोगों को 10 दिन इंतज़ार करना होगा। देवउठनी ग्यारस के बाद पहला विवाह मुहूर्त 19 नवंबर को है। नवंबर में लगातार मुहूर्त हैं। इसके बाद फिर 12 दिसंबर से एक माह के लिये प्रतिबंध लग जायेगा।

14 जनवरी से आरंभ होंगे विवाह : ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 15 दिसंबर के बाद एक माह के लिये शादियों पर फिर रोक लग जायेगी। 16 दिसंबर को सूर्य अपने गुरु की राशि धनु में प्रवेश कर जायेंगे। इसी के साथ खरमास आरंभ हो जायेगा। खरमास में शादियां नहीं होतीं। इसलिये एक माह बाद 14 जनवरी 2020 को सूर्य के कुंभ राशि में आने के बाद फिर शादियां आरंभ होंगी।

08 नवंबर को देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने की नींद से जागने वाले हैं और इसके साथ ही चतुर्मास व्रत भी समाप्त होने वाला है। शास्त्रों में कहा गया है कि चतुर्मास के दौरान जब भगवान शयन में रहते हैं उस दौरान विवाह, जनेऊ, मुण्डन जैसे संस्कार नहीं करना चाहिये क्योंकि इन शुभ कार्यों पर भगवान का आशीर्वाद नहीं होता है। इसके अलावा जब शुक्र और गुरु अस्त होते हैं उस दौरान भी ये शुभ काम नहीं होना चाहिये। विवाह आदि शुभ कर्म मलमास के दौरान यानी जब सूर्य धनु और मीन राशि में हों तब भी नहीं करना चाहिये।